हिमाचल प्रदेश में आज रात से फिर सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ,17 से 19 अप्रैल तक बारिश, बर्फबारी की संभावना 

हिमाचल प्रदेश में आज रात से एक पश्चिमी विक्षोभ फिर से सक्रिय हो रहा है जिसका असर 17 से 19 अप्रैल के दौरान पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 17 अप्रैल को चार जिलों कुल्लू, कांगड़ा, मंडी,चंबा के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया

Apr 16, 2026 - 11:20
Apr 16, 2026 - 11:22
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हिमाचल प्रदेश में आज रात से फिर सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ,17 से 19 अप्रैल तक बारिश, बर्फबारी की संभावना 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    16-04-2026

हिमाचल प्रदेश में आज रात से एक पश्चिमी विक्षोभ फिर से सक्रिय हो रहा है जिसका असर 17 से 19 अप्रैल के दौरान पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 17 अप्रैल को चार जिलों कुल्लू, कांगड़ा, मंडी,चंबा के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मैदानी इलाकों में बारिश जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में 17 और 19 अप्रैल बर्फबारी की संभावना जताई गई है जबकि कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी होगी। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण कुल्लू, कांगड़ा, मंडी और चंबा जिलों में ओलावृष्टि हो सकती है। 

जिसके लिए कल 17 अप्रै के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। ऊंचाई वाले और मध्य पर्वतीय जिलों में बारिश, ओलावृष्टि, बर्फबारी,तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना है। हालांकि इस दौरान तापमानों में हल्की गिरावट देखने को मिलेगी जबकि 19 अप्रैल के बाद तापमानों में बढ़ौतरी होगी।

हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है हालांकि लाहौल स्पीति में मानसून सामान्य से अधिक रह सकता है लेकिन अन्य सभी जिलों में मानसून सामान्य या सामान्य से कम रहने का पूर्वानुमान है।

मौसम वैज्ञानिक शोभित कटियार ने बताया कि केवल लाहौल-स्पीति जिले में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है, जबकि हमीरपुर, किन्नौर और चंबा जिलों के कुछ हिस्सों में मानसून की सामान्य बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में मानसून कमजोर रहने का अनुमान है।

इस बार मानसून पर El Niño, सकारात्मक Indian Ocean Dipole (IOD) और उत्तरी गोलार्ध में बर्फ की कम मात्रा जैसे कारकों का प्रभाव पड़ेगा जिसके चलते पूरे भारत में मॉनसून कमजोर रहेगा।एल नीनो की स्थिति बनने से आमतौर पर कम बारिश होती है, हालांकि मानसून के अंत तक सकारात्मक IOD कुछ हद तक वर्षा को बढ़ावा दे सकता है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो दशकों में अधिकांश वर्षों में बारिश सामान्य या सामान्य से कम रही है। हालांकि वर्ष 2010 में 10 प्रतिशत अधिक, 2018 और 2023 में 21-21 प्रतिशत अधिक और 2025 में 39 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई थी जिससे हिमाचल प्रदेश को आपदाओं का सामना भी करना पड़ा था।

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