बैंक मैनेजर और कैशियर की मिलीभगत से ठियोग में बड़ा फर्जीवाड़ा , जाली दस्तावेजों से लिया 56.83 लाख का लोन

आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए बैंक प्रबंधक व कैशियर से मिलकर जाली दस्तावेजों से 56.83 लाख का लोन लेने का मामला सामने आया है। यह मामला जिला के ठियोग उपमंडल के तहत प्रकाश में आया है। मामले के अनुसार एक शख्स ने 4 लोगों के फर्जी दस्तावेजों और पहचान का दुरुपयोग करते हुए 56.83 लाख रुपए का लोन ले लिया। इस धोखाधड़ी में तत्कालीन दो बैंक अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई है

May 3, 2025 - 20:10
May 3, 2025 - 20:25
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बैंक मैनेजर और कैशियर की मिलीभगत से ठियोग में बड़ा फर्जीवाड़ा , जाली दस्तावेजों से लिया 56.83 लाख का लोन
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  03-05-2025
आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए बैंक प्रबंधक व कैशियर से मिलकर जाली दस्तावेजों से 56.83 लाख का लोन लेने का मामला सामने आया है। यह मामला जिला के ठियोग उपमंडल के तहत प्रकाश में आया है। मामले के अनुसार एक शख्स ने 4 लोगों के फर्जी दस्तावेजों और पहचान का दुरुपयोग करते हुए 56.83 लाख रुपए का लोन ले लिया। इस धोखाधड़ी में तत्कालीन दो बैंक अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई है। 4 शिकायतकर्ताओं की तहरीर पर पुलिस ने मुख्य आरोपी और दो तत्कालीन बैंक अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। 
यह मामला ठियोग निवासी इंदर सिंह पुत्र लायक राम, अनिल वर्मा पुत्र नानक चंद, जगदीश पुत्र केवल राम और हरीश चौहान पुत्र प्यारे लाल द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। इन्होंने शिकायत में बताया है कि ठियोग के भलेच गांव के रहने वाले संजीव कुमार ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए इन व्यक्तियों की पहचान का गलत उपयोग करते हुए बैंकों से भारी भरकम ऋण ले लिया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संजीव कुमार ने उनके नाम से ऋण की सीमा (लिमिट) बनवाई और उनसे संबंधित पहचान दस्तावेजों को जाली तरीके से तैयार किया गया। 
इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक से ऋण मंजूर करवाया गया और राशि को निकाल लिया। आरोप है कि यह सारा फर्जीवाड़ा बैंक ऑफ इंडिया की सरोग शाखा में उस समय तैनात शाखा प्रबंधक (अब सेवानिवृत्त) और कैशियर की मिलीभगत से किया गया। इन दोनों बैंक अधिकारियों ने संजीव कुमार के साथ मिलकर फर्जी लोन आवेदन स्वीकृत करवाए और फिर संजीव ने इन खातों से राशि निकाल ली। 
यह रकम भी संजीव कुमार द्वारा निकाली गई। सभी मामलों में संजीव कुमार ने जिन लोगों के नाम पर लोन लिया तो उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी और जब उनके पास बैंकों की नोटिस या कॉल्स आने लगीं, तब जाकर यह फर्जीवाड़ा सामने आया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संजीव कुमार ने बैंकों से राशि निकलवाने के लिए खुद को संबंधित व्यक्ति दर्शाया और नकली हस्ताक्षर करवा कर या स्वयं करके बैंक से रकम निकाली।

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