हिमाचल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रदेश सरकार का आघात तानाशाहीपूर्ण निर्णय : HPUTWA
हिमाचल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय एवं शैक्षणिक स्वायत्तता पर प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे हस्तक्षेप के विरोध में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (HPUTWA) ने आज कड़ा विरोध दर्ज करवाया। संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए वर्तमान विधेयक को विश्वविद्यालयों की वित्तीय शक्तियों, चयन प्रक्रिया तथा स्वायत्तता पर गंभीर आघात बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
यंगवार्ता न्यूज - शिमला, 8 सितम्बर :
हिमाचल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय एवं शैक्षणिक स्वायत्तता पर प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे हस्तक्षेप के विरोध में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (HPUTWA) ने आज कड़ा विरोध दर्ज करवाया। संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए वर्तमान विधेयक को विश्वविद्यालयों की वित्तीय शक्तियों, चयन प्रक्रिया तथा स्वायत्तता पर गंभीर आघात बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ का एक प्रतिनिधिमंडल आज माननीय राज्यपाल हिमाचल प्रदेश जी से मिला तथा उन्हें वर्तमान विधेयक के संबंध में विश्वविद्यालय शिक्षक समुदाय की गंभीर चिंताओं से अवगत करवाया। प्रतिनिधिमंडल ने माननीय राज्यपाल जी को बताया कि प्रस्तावित विधेयक प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्थापित प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय शक्तियों तथा स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षण संस्थान नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, शोध, नवाचार और स्वतंत्र चिंतन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वायत्तता अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करने वाला कोई भी निर्णय प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न कर सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने माननीय राज्यपाल जी के समक्ष यह भी मुद्दा उठाया कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों एवं अन्य शैक्षणिक पदों की चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार संचालित की जाती है। UGC के नियमों का पालन विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और अकादमिक मानकों को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
संघ ने चिंता व्यक्त की कि यदि विश्वविद्यालयों की चयन प्रक्रिया में ऐसे परिवर्तन किए जाते हैं जो UGC के निर्धारित नियमों और मानकों के विपरीत हों, तो इसका गंभीर प्रभाव विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। UGC के नियमों की अवहेलना की स्थिति में विश्वविद्यालयों को मिलने वाली UGC की अनुदान राशि एवं अन्य वित्तीय सहायता भी प्रभावित हो सकती है।
HPUTWA ने माननीय राज्यपाल हिमाचल प्रदेश से इस महत्वपूर्ण विषय में हस्तक्षेप करने की मांग की तथा आग्रह किया कि विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व शिक्षकों, शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय समुदाय से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
माननीय राज्यपाल से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व HPUTWA के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने किया। प्रतिनिधिमंडल में HPUTWA के महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज, उपाध्यक्ष डॉ. योगराज, एल्यूमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. चंद्रमोहन, प्रो. संजय, डॉ. राकेश, डॉ. धीरज रावत तथा डॉ. जोगिंदर सकलानी शामिल रहे।
माननीय राज्यपाल से मुलाकात के पश्चात हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति कार्यालय के बाहर वर्तमान विधेयक के विरोध में जोरदार रोष प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के लगभग सभी प्राध्यापकों ने भाग लिया और प्रस्तावित विधेयक को वापस लेने की मांग की।
कुलपति कार्यालय के बाहर शिक्षकों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर किसी भी प्रकार का आघात स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने प्रदेश सरकार से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वायत्तता को बहाल रखने और विश्वविद्यालयों की स्थापित व्यवस्था में अनावश्यक हस्तक्षेप न करने की मांग की।
रोष प्रदर्शन को डॉ. सुरेन्द्र शर्मा, डॉ. राजेश, डॉ. प्रियंका वैद्य, डॉ. सनी अटवाल तथा डॉ. जोगिंदर सकलानी ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता उच्च शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है।
वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया को योग्यता, पारदर्शिता और UGC द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ही संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करने से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य और अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
HPUTWA के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा आघात शिक्षक समुदाय किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता केवल शिक्षकों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की उच्च शिक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का शिक्षक समुदाय विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता की रक्षा के लिए पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने प्रदेश सरकार से वर्तमान विधेयक पर पुनर्विचार करने और विश्वविद्यालयों की वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले प्रावधानों को वापस लेने की मांग की।
HPUTWA ने स्पष्ट किया कि यदि प्रदेश सरकार ने शिक्षक समुदाय की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया और वर्तमान विधेयक को वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों तथा अकादमिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए शिक्षक समुदाय का संघर्ष लोकतांत्रिक तरीके से निरंतर जारी रहेगा।
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