यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 14-09-2026
राजधानी शिमला में आवारा कुत्तों, बंदरों और लंगूरों के बढ़ते आतंक से आम जनता का जीवन संकट में पड़ गया है। शिमला में इस बढ़ते आतंक के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।यह तक कि एक महिला को जान से हाथ भी धोना पड़ा।प्रत्येक दिन अस्पताल में डॉग व मंकी बाइट के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। शिमला शहर में इन बढ़ती समस्या को लेकर आज सोमवार कको शिमला नागरिक सभा ने नगर निगम के खिलाफ उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को उग्र रूप देकर नगर निगम का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान शिमला नागरिक सभा के सचिव विवेक कश्यप ने कहा कि शहर में जानवरों के हिंसक हमलों से लगातार जनहानि हो रही है।
हाल ही में सिमिट्री क्षेत्र में एक महिला पर बंदरों ने हमला कर दिया, जिससे गिरकर दो दिन पहले उनकी मृत्यु हो गई। सभा ने इस घटना को नगर निगम की ढुलमुल कार्यप्रणाली का नतीजा बताते हुए पीड़ित परिवार को ₹5 लाख मुआवजा देने की मांग की है। कश्यप ने नगर निगम द्वारा बनाए गए फीडिंग पॉइंट्स पर सवाल उठाते हुए कहा कि कृष्णा नगर, संजोली और माल रोड जैसे मुख्य और भीड़भाड़ वाले रास्तों पर फीडिंग पॉइंट्स बना दिए गए हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, स्मार्ट सिटी के तहत बने विकास नगर से छोटा शिमला मार्ग जैसे फुटब्रिज पर भी जानवरों के जमावड़े के कारण वे जानलेवा बन चुके हैं।
सभा ने स्पष्ट किया कि वे जानवरों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बंदरों का प्राकृतिक वास जंगल है। नगर निगम को वन विभाग के साथ मिलकर एक स्थाई नीति बनानी चाहिए। सभा ने कमिश्नर को 7 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए जल्द से जल्द राहत देने की मांग की है।बंदरों को शहर के बजाए जंगलों में बसाया जाना चाहिए और खूंखार कुत्तों को शहर से तुरंत हटाकर उनके लिए विशेष शेल्टर/जोन बनाए जाने चाहिए। उन्होंने जनता से भी अपील की कि आस्था के नाम पर आवारा जानवरों को खुले में चिप्स, बर्गर और जंक फूड न खिलाएं, क्योंकि इससे उनका स्वभाव और हिंसक हो जाता है।
कश्यप ने नगर निगम से मांग की कि नियमों का उल्लंघन कर गलत जगहों पर जानवरों की फीडिंग कराने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।उन्होंने चेतावनी दी कि केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, क्योंकि अक्सर प्रदर्शन के बाद कुत्ता पकड़ने वाली गाड़ियां महज 4-5 दिन ही चलती हैं। जब तक इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, नागरिक सभा शिमला के हर वार्ड में जाकर लोगों को लामबंद करेगी और जरूरत पड़ने पर नगर निगम का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेगी।