यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 25-05-2026
हिमाचल में जनसंख्या को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है , जबकि बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। हाल ही में जारी सामाजिक और जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की आबादी में लगातार इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 0 से 14 वर्ष तक के बच्चों की आबादी पहले की तुलना में कम हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि घटती जन्मदर , बढ़ती शिक्षा और बदलती जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं। दूसरी ओर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जीवन प्रत्याशा बढ़ने से बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि प्रदेश में 44 प्रतिशत से अधिक आबादी अविवाहित है।
इसमें युवाओं के साथ-साथ कामकाजी वर्ग भी शामिल है। सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि रोजगार, करियर और बदलती सामाजिक सोच के चलते लोग शादी देर से कर रहे हैं या शादी से दूरी बना रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में राज्य को बुजुर्गों की देखभाल, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं बच्चों की घटती संख्या का असर भविष्य में स्कूलों और कार्य बल पर भी दिखाई दे सकता है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2024 की रिपोर्ट में प्रदेश की बदलती जनसंख्या संरचना को लेकर महत्वपूर्ण संकेत देखने को मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की आबादी में केरलम 15.1 प्रतिशत के साथ पहले , तमिलनाडु 14.2 प्रतिशत के साथ दूसरे और हिमाचल 13 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 9.7 प्रतिशत से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में पुरुष बुजुर्ग आबादी 12.4 प्रतिशत और महिला बुजुर्ग आबादी 13.6 प्रतिशत दर्ज की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग आबादी 13.2 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 10.9 प्रतिशत है। इससे भविष्य में श्रमशक्ति, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है। राज्य में बच्चों की आबादी लगातार घट रही है। कम प्रजनन दर, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, बढ़ती अविवाहितों की संख्या, छोटे परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति, महिलाओं की शिक्षा और परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता जैसे प्रमुख कारण हैं, जिनका सबसे ज्यादा असर जन्म दर पर हुआ है। इससे हिमाचल तेजी से वृद्धजन प्रधान राज्य बन रहा है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में 0-4 वर्ष आयु वर्ग की आबादी केवल 6.5 प्रतिशत दर्ज की गई है , जबकि राष्ट्रीय औसत 7.9 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 6.6 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में केवल 5.1 प्रतिशत है। बिहार में यही आंकड़ा 11.1 प्रतिशत है। हिमाचल अब देश के उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहां बच्चों की संख्या तेजी से घट रही है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में 44.5 प्रतिशत आबादी अविवाहित है। जन्म दर कम होने का यह भी एक कारण है। हिमाचल में 51.7 प्रतिशत आबादी विवाहित है, जो राष्ट्रीय औसत 46.2 प्रतिशत से अधिक है।
विधवा, तलाकशुदा अथवा अलग रह रही आबादी 3.8 प्रतिशत है। हिमाचल में 15-59 आयु वर्ग की आबादी 66.5 प्रतिशत दर्ज की गई है , जो राष्ट्रीय औसत 66.4 प्रतिशत के करीब है। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 71.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पुरुष 66.3 प्रतिशत और महिलाएं 66.8 प्रतिशत हैं। यह संकेत देता है कि वर्तमान में राज्य के पास पर्याप्त कार्यशील आबादी है, लेकिन आने वाले वर्षों में बुजुर्ग आबादी बढ़ने से यह संतुलन बदल सकता है। हिमाचल में 0-14 वर्ष आयु वर्ग की आबादी 20.4 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 24 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 20.7 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 18 प्रतिशत है। जबकि बिहार में 31.5, मध्य प्रदेश में 27.4 और राजस्थान व उत्तर प्रदेश में 27.3 प्रतिशत आबादी 0-14 वर्ष आयु वर्ग में है। हिमाचल में घटती युवा आबादी भविष्य में स्कूलों में छात्रों की संख्या कम होने और श्रम शक्ति पर असर डाल सकती है।