प्रदेश में बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस विभाग ने आधुनिक तकनीक का लिया सहारा
प्रदेश में बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। राज्य भर में ईडार प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 06-02-2026
प्रदेश में बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। राज्य भर में ईडार प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया गया है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से दुर्घटनाओं का न केवल पंजीकरण होगा, बल्कि उनके कारणों और पैटर्न का वैज्ञानिक विश्लेषण कर समय रहते रोकथाम भी की जाएगी।
प्रदेश में हर साल औसतन करीब 1920 सडक़ दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 800 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। पुलिस का उद्देश्य ईडार के जरिए इन आंकड़ों को जड़ से कम करना है। यह प्रणाली दुर्घटना के समय, स्थान, कारण, वाहन और पीडि़त से जुड़ी हर जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज करती है, जिससे भविष्य की रणनीति तय की जा सके।
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने सडक़ सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि ईडार केवल रिपोर्टिंग का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर वहां पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करता है। प्रदेश में शाम छह से नौ बजे तक डेंजर विंडो घोषित की गई है, इस समय सबसे ज्यादा हादसे होते हैं।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर ने बताया कि ईडार पोर्टल दुर्घटना स्थल और न्याय प्रणाली के बीच एक मजबूत कड़ी है। आम लोगों के लिए ईडार के तीन बड़े फायदे हैं।
जिसमें डिजिटल रिपोर्टिंग से सीधे मदद मिलेगी और 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, दुर्घटना की जानकारी ईडार पर दर्ज होने पर पीडि़त को तुरंत कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। फास्ट-ट्रैक बीमा दावा डिजिटल रिपोर्ट सीधे मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण को भेजी जाती है, जिससे बीमा क्लेम जल्दी निपटता है।
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