केंद्रीय करों और अनुदान-एड में यूपीए के बदले मोदी सरकार ने हिमाचल को दिया कई गुना ज़्यादा पैसा : भाजपा

आज नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश के सांसदों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की , जिसमें उन्होंने 2014-2026 के दौरान केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को दिए गए काफी अधिक हस्तांतरणों और विकास निवेशों को 2004-14 की अवधि की तुलना में उजागर किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने किया और जिसमें शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप , कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद राजीव भारद्वाज , राज्य सभा सांसद हर्ष महाजन व   सिकंदर कुमार की गरिमायी उपस्थिति रही

Feb 5, 2026 - 18:20
Feb 5, 2026 - 18:55
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केंद्रीय करों और अनुदान-एड में यूपीए के बदले मोदी सरकार ने हिमाचल को दिया कई गुना ज़्यादा पैसा : भाजपा
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media
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न्यूज़ एजेंसी - नई दिल्ली  05-02-2026
आज नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश के सांसदों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की , जिसमें उन्होंने 2014-2026 के दौरान केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को दिए गए काफी अधिक हस्तांतरणों और विकास निवेशों को 2004-14 की अवधि की तुलना में उजागर किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने किया और जिसमें शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप , कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद राजीव भारद्वाज , राज्य सभा सांसद हर्ष महाजन व   सिकंदर कुमार की गरिमायी उपस्थिति रही। सांसदों ने इस प्रेस कांफ्रेंस में सेक्टर-दर-सेक्टर कर हस्तांतरण और वित्त आयोग के परिणामों से लेकर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नए केंद्रीय संस्थानों तक केंद्र द्वारा हिमाचल की सहायता के साक्ष्य को पटल पर रखा ताकि यह दिखाया जा सके कि केंद्र प्रायोजित सहायता ने राज्य में निवेश और कनेक्टिविटी को कैसे बढ़ावा दिया। 
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा 2014 से अब तक केंद्र सरकार ने हिमाचल की दिल खोल कर मदद की। यूपीए के कार्यकाल में हिमाचल का जो विशेष राज्य का दर्जा छीन लिया गया था , उसे मोदी जी ने वापस हिमाचल को दिया। कांग्रेस जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। अगर यूपीए सरकार के 2004 से 2014 तक तक केंद्रीय करों में हिमाचल के हिस्सेदारी की बात करें तो यह मात्र 12,639 करोड़ रुपये थी, जबकि मोदी सरकार के 2014 से 2026 के बीच यह बढ़कर 76,799 करोड़ रुपये हो गया। यूपीए के समय केंद्र से हिमाचल को कुल 50,298 करोड़ रुपये का अनुदान-एड मिला जो कि 2014 से 2024 तक मोदी सरकार के समय में बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये हो गए। हम मौजूदा समय की बात करें तो नए वित्त आयोग के फॉर्मूले के तहत हिमाचल का शुद्ध संघीय करों में हिस्सा 0.830% ( 15वें FC के आधार पर ) से बढ़कर 16वें FC के तहत 0.914% हो गया है, जो एक संरचनात्मक वृद्धि को दिखाता है। हिमाचल प्रदेश राज्य को वित्त वर्ष 2004-05 से 2013-14 के दौरान पीएमजीएसवाई के अंतर्गत जारी केंद्रीय धन राशि:  रु. 1,549.15 करोड़ थी जोकि वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 (04.02.2026 तक) के दौरान पीएमजीएसवाई के अंतर्गत जारी केंद्रीय धन राशि रु. 6,895.89 करोड़ रुपये हो गई। 
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ हम सभी सांसद अपनी ओर से हिमाचल के मुख्यमंत्री व कांग्रेस सरकार से अनुरोध करते हैं कि आप दिल्ली आइए और आपने जो ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज ले रखा है उस ब्याज दर को कम करने के लिए, हिमाचल का बोझ कम करने के लिए  हम आपके साथ वित्त मंत्रालय के साथ बैठक करने को तैयार हैं। हमें अपना हिमाचल प्यारा है और आरोप प्रत्यारोप की राजनीति की बजाय आप रिफॉर्म्स लाइए हम आपका सहयोग करने के लिए तैयार हैं। हाल ही में कांग्रेस शासित राज्य तेलंगाना के मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी जी अपने प्रदेश की इसी तरह की समस्या को लेकर दिल्ली आए जिस पर प्रधानमंत्री जी व वित्त मंत्री जी ने उनकी मदद की जिसका जिक्र रेड्डी जी ने तेलंगाना की विधानसभा में किया की केंद्र सरकार ने उनकी मदद की। हम को ऑपरेटिव फेडरलिज्म में भरोसा रखते हैं और यदि तेलंगाना कर सकता है तो हिमाचल क्यों नहीं। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि पहाड़ी राज्यों के लिए पूंजीगत सहायता के प्रति केंद्र का रवैया भी बदला है। राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता (SASCI) ने ब्याज-मुक्त 50 वर्षीय ऋण प्रदान किए और 2020-21 से जनवरी 2026 तक हिमाचल को लगभग Rs. 8,309 करोड़ दिए, जो पहले की अवधि में मौजूद नहीं था। वित्त आयोग से जुड़े स्थानीय निकायों के अनुदान भी हिमाचल के लिए काफी बढ़े हैं, जिसमें ग्रामीण स्थानीय निकायों को अकेले 16वें FC के तहत Rs. 3744 करोड़ मिले हैं, जो 15वें FC के Rs. 1673 करोड़ से लगभग दोगुना है। 
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “2014 से हिमाचल में स्थापित केंद्रीय संस्थानों और उनके बाद आए फंड तथा परियोजनाओं   में AIIMS बिलासपुर (लागत ~Rs.1,470+ करोड़), हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (500 करोड़), IIM सिरमौर (531.75 करोड़), IIIT ऊना (Rs 64 करोड़), चंबा/हमीरपुर/नाहन में कई नए मेडिकल कॉलेज (700 करोड़) और औद्योगिक विकास योजना सहायता (सितंबर 2023 में Rs.1,164 करोड़ स्वीकृत) शामिल हैं। औद्योगिक परियोजनाओं में ऊना बल्क ड्रग पार्क (Rs.1,000 करोड़ केंद्रीय फंडिंग) और नालागढ़ मेडिकल डिवाइसेज पार्क को हाइलाइट किया गया, जो रोजगार सृजन और राज्य के विनिर्माण आधार को मजबूत करने वाले उत्प्रेरक प्रोजेक्ट हैं। सांसदों ने पहले दशक की तुलना में कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भारी छलांग पर जोर दिया। रेलवे के तहत केंद्र ने 2026-27 में अकेले Rs. 2,911 करोड़ आवंटित किए हैं और वर्षों में चार प्रमुख नई रेल ट्रैक परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें 255 किमी नई ट्रैक निर्माणाधीन हैं (अनुमानित लागत ~Rs.13,168 करोड़), साथ ही 2014-26 में 24 रेल फ्लाईओवर/अंडरब्रिज पूरे किए गए हैं। ब्रिफिंग में नामित नई लाइनें शामिल हैं: नंगल-ऊना-तलवाड़ा, भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी , चंडीगढ़-बड्डी और कांगड़ा गेज बहाली , अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चार स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। 
हाईवे के तहत जून 2025 तक राज्य में 2,600 किमी से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए गए हैं, और प्रमुख NH सेक्शन (जैसे किरतपुर-नेरचौक) का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है। अनुराग सिंह ठाकुर ने समझाया कि “16वें FC ने मानदंडों के वेट को संशोधित किया है, उदाहरण के लिए जनसंख्या (2011) का वेट बढ़ा है जबकि क्षेत्र का वेट 15% से घटकर 10% हो गया है और नया “जीडीपी में योगदान” पैरामीटर (10%) जोड़ा गया है। इन समायोजनों से हिमाचल का हिस्सा 0.830% से बढ़कर 0.914% हो गया और अनुमानों के अनुसार 2026-27 में वार्षिक हस्तांतरण प्राप्तियां 2025-26 के 11,561.66 करोड़ से बढ़कर 13,947 करोड़ हो गई , यानी 2300 करोड़ से अधिक की वृद्धि। सांसदों ने डेटा का उपयोग करके दिखाया कि कई राज्य, जिसमें कई विपक्षी शासित राज्य भी शामिल हैं, FC-16 के तहत बढ़ा हुआ हिस्सा देख रहे हैं, जो बदलाव की निष्पक्ष, फॉर्मूला-आधारित प्रकृति को रेखांकित करता है। 

 

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