सैहब कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 10% वार्षिक वेतन वृद्धि खत्म करने पर भड़का विरोध
सैहब सोसाइटी एजीएम में सैहब कर्मियों की दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि को खत्म करने के खिलाफ सीटू से संबंधित सैहब सोसाइटी यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर गई है। उपायुक्त शिमला द्वारा एस्मा लागू करने के बावजूद हड़ताल में घर - घर से कूड़ा उठाने वाले, सुपरवाइजर, सड़क सफाई कर्मी व ड्राइवर सहित सभी सैहब कर्मी शामिल रहे
डीसी ऑफिस शिमला पर हुए प्रदर्शन को सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला सचिव बालक राम, विवेक कश्यप, यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह, महासचिव ओमप्रकाश गर्ग, उपाध्यक्ष अमित भाटिया, रवि कुमार दलित, कर्म चंद भाटिया, सुशील कुमार बौद्ध, विकास थापटा, रोड़ स्वीपिंग स्टाफ नेता प्रमोद कुमार, सुरेन्द्र गिल लक्की, लक्की मट्टू, राहुल सलोत्रा आदि ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि कटौती के निर्णय की कड़ी निंदा की व इसे नगर निगम प्रशासन की तानाशाही करार दिया। उन्होंने कहा कि दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि की एवज में घोषित किए गए तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता डीए से हर मजदूर के वेतन में भविष्य में हर महीने सात सौ रुपए से एक हजार रुपए का नुकसान होगा। उन्होंने इसके खिलाफ सैहब कर्मियों से निर्णायक आंदोलन का आह्वान किया है।
वक्ताओं ने नगर निगम शिमला प्रशासन पर मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि हर वर्ष जनता की कूड़े, पानी व प्रॉपर्टी टैक्स की दरों में दस प्रतिशत बढ़ोतरी की जा रही है परंतु इस पैसे को बेहद मुश्किल काम करने वाले सैहब कर्मियों पर खर्च करने के बजाए नगर निगम अधिकारी फिजूलखर्ची में इस्तेमाल कर रहे हैं। सैहब कर्मियों पर पिछले कुछ सालों में काम का बोझ चार गुणा बढ़ा दिया गया है। उनके काम करने के घरों की संख्या 80 से बढ़ाकर 300 तक कर दी गई है परंतु उनका वेतन बढ़ाने के बजाए उनकी दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि को खत्म कर तीन प्रतिशत डीए लागू कर दिया गया है जोकि असंगत है। यह तीन प्रतिशत डीए दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि के अलावा होना चाहिए था। नगर निगम प्रशासन ने ढाई करोड़ रुपए का बेवजह खर्च क्यू आर कोड पर खर्च किया है जिस से 150 नए मजदूरों को रोजगार दिया जा सकता था व पुराने सैहब कर्मियों पर काम का बोझ कम किया जा सकता था। इस पैसे से सभी सैहब कर्मियों को तीन वर्ष तक बोनस एक्ट 1965 के प्रावधानों के अनुसार 1500 रुपए बोनस को बढ़ाकर 2 हजार रुपए करने के बजाए नियमानुसार बोनस दिया जा सकता था जोकि इस से 8 गुणा ज्यादा होना था। सात छुट्टियों की घोषणा सालाना कानूनी 39 छुट्टी से बहुत कम है व यह मजदूरों को भ्रमित करने के सिवाए कुछ भी नहीं है। मजदूरों की 15 दिन की स्पेशल लीव भी रदद कर दी गई है जोकि तानाशाही है। इस से साफ पता चलता है कि नगर निगम प्रशासन सैहब कर्मियों के खिलाफ है। सैहब कर्मियों को छुट्टियों, ओवरटाइम वेतन व अतिरिक्त कार्य के अतिरिक्त वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। नगर निगम प्रशासन द्वारा श्रम कानूनों का पूर्ण उल्लंघन किया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मियों को सैहब कर्मी बनाकर सिर्फ एक झुनझुना थमाया है जिससे किसी भी आउटसोर्स कर्मी को कोई फायदा नहीं होगा। यह फायदा तभी मिल सकता था यदि सैहब में डाले गए आउटसोर्स कर्मियों के लिए दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि का आर्थिक लाभ मिलता अन्यथा यह सिर्फ चुनावी वायदे की तरह एक चोंचला है।
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