प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने जिले में कार्यरत 91 जेबीटी अध्यापकों को प्लेसमेंट आधार पर मुख्य शिक्षक किया नियुक्त  

जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा जिले में कार्यरत 91 जेबीटी अध्यापकों को प्लेसमेंट आधार पर मुख्य शिक्षक नियुक्त

Feb 7, 2026 - 19:40
Feb 7, 2026 - 19:46
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प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने जिले में कार्यरत 91 जेबीटी अध्यापकों को प्लेसमेंट आधार पर मुख्य शिक्षक किया नियुक्त  
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन    07-02-2026

जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा जिले में कार्यरत 91 जेबीटी अध्यापकों को प्लेसमेंट आधार पर मुख्य शिक्षक नियुक्त किया गया है। 

यह नियुक्तियां लंबे समय से रिक्त पड़े मुख्य शिक्षक के पदों को भरने के उद्देश्य से की गई हैं, जिससे प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को गति मिल सके। जानकारी के अनुसार, इन सभी जेबीटी अध्यापकों को प्लेसमेंट आधार पर मुख्य शिक्षक बनाकर उन विद्यालयों में तैनात किया गया है, जहां मुख्य शिक्षक के पद खाली थे। 

विभाग ने नियुक्तियों के दौरान विद्यालयों की वास्तविक स्थिति और जरूरतों को प्राथमिकता दी है। कई ऐसे प्राथमिक विद्यालय, जो अब तक बिना नियमित अध्यापक के केवल प्रतिनियुक्ति के सहारे संचालित हो रहे थे, वहां भी मुख्य शिक्षक की नियुक्ति की गई है।

इसके अलावा, कुछ जेबीटी अध्यापकों को उन स्कूलों में तैनात किया गया है, जहां विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक थी, लेकिन स्टाफ के रूप में केवल एक ही अध्यापक कार्यरत था। इन विद्यालयों में लंबे समय से शिक्षण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ था। 

नई नियुक्तियों से न केवल शिक्षकों का कार्यभार संतुलित होगा, बल्कि विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय से जिला सिरमौर के प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा। 

मुख्य शिक्षक की उपलब्धता से विद्यालयों के प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित होंगे और शिक्षण गतिविधियों की नियमित निगरानी भी संभव हो पाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह व्यवस्था स्थायी नियुक्तियों तक एक प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लागू की गई है, ताकि बच्चों की पढ़ाई किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।

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