केएनएच से गायनी सेवाएं शिफ्ट करने के विरोध में सचिवालय मार्च, पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प

कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) से गायनी ओपीडी और वार्ड को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में शिफ्ट करने के विरोध में मंगलवार को अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने सचिवालय मार्च निकाला। शिमला के टोलैंड से शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने विरोध को जोरदार तरीके से दर्ज कराया

Sep 15, 2026 - 14:59
Sep 15, 2026 - 15:04
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केएनएच से गायनी सेवाएं शिफ्ट करने के विरोध में सचिवालय मार्च, पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  15-09-2026
कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) से गायनी ओपीडी और वार्ड को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में शिफ्ट करने के विरोध में मंगलवार को अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने सचिवालय मार्च निकाला। शिमला के टोलैंड से शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने विरोध को जोरदार तरीके से दर्ज कराया। सचिवालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। 

इस दौरान सचिवालय के बाहर पुलिस और महिला समिति की कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प भी देखने को मिली। जनवादी महिला समिति की सचिव फाल्मा चौहान ने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल लंबे समय से महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान रहा है और यहां उपलब्ध गायनी सेवाएं हजारों महिलाओं को लाभ पहुंचाती हैं। उनका आरोप है कि गायनी ओपीडी और वार्ड को आईजीएमसी शिफ्ट करने से मरीजों, उनके परिजनों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वीआईपी को लाभ देने के मकसद से अस्पताल को तोड़ा जा रहा है। अस्पताल को तोड़कर विधायकों के लिए मकान बनाए जा रहें हैं जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। 
 
 
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए केएनएच की गायनी सेवाओं को यथावत रखने की मांग उठाई। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए सचिवालय की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कमला नेहरू अस्पताल राजधानी शिमला ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान के रूप में सेवाएं प्रदान कर रहा है। ऐसे में यहां संचालित गायनी ओपीडी और वार्ड को आईजीएमसी में स्थानांतरित करने का फैसला मरीजों के हित में नहीं है।
 

सचिवालय के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प
प्रदर्शनकारियों को सचिवालय की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी। जैसे ही महिला समिति की कार्यकर्ता सचिवालय के नजदीक पहुंचीं, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। 

देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प भी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा उन्हें रोकने का विरोध किया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी जारी रखी। काफी देर तक सचिवालय के बाहर प्रदर्शन का माहौल बना रहा।

'महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधा से वंचित करने की कोशिश'
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की सचिव फाल्मा चौहान ने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल लंबे समय से महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है। यहां उपलब्ध गायनी सेवाओं का लाभ शिमला के अलावा प्रदेश के दूरदराज के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली महिलाएं भी लेती हैं। उन्होंने कहा कि यदि गायनी ओपीडी और वार्ड को आईजीएमसी में शिफ्ट किया जाता है तो इससे मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ेंगी। 
खासकर दूरदराज के क्षेत्रों से उपचार के लिए शिमला पहुंचने वाली महिलाओं को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फाल्मा चौहान ने आरोप लगाया कि VIP लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कमला नेहरू अस्पताल को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की जगह विधायकों के लिए आवास बनाने की योजना पूरी तरह गलत है। 
उनका कहना था कि सरकार को अस्पताल की सुविधाओं का विस्तार करने और महिलाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि मौजूदा स्वास्थ्य संस्थान को कमजोर करने पर। उन्होंने सरकार से मांग की कि केएनएच की गायनी ओपीडी और वार्ड को शिफ्ट करने का फैसला वापस लिया जाए और अस्पताल में महिलाओं को पहले की तरह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं।

SFI और CITU ने भी दिया समर्थन
महिला समिति के इस आंदोलन को छात्र संगठन एसएफआई और मजदूर संगठन सीटू (CITU) के प्रतिनिधियों ने भी समर्थन दिया। दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में शामिल होकर केएनएच की गायनी सेवाओं को शिफ्ट करने के फैसले का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं आम जनता की जरूरत है और किसी भी अस्पताल की सेवाओं में बदलाव करने से पहले मरीजों की सुविधा, चिकित्सकीय जरूरतों और अस्पताल की उपयोगिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। महिला समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी के चलते सचिवालय के आसपास काफी देर तक राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज रहीं।

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