यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 15-09-2026
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उत्तराखंड से लेकर कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश तक कांग्रेस नेताओं तथा सत्ता से जुड़े लोगों के खिलाफ सामने आ रहे भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप अनेक सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व देशभर में संविधान, पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करता है, लेकिन जब सवाल अपने नेताओं और सरकारों पर उठते हैं तो कांग्रेस नेतृत्व को उसी कसौटी पर जवाब देना चाहिए। डॉ. बिंदल ने कहा कि उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी सहयोगी एवं पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह मामला वर्ष 2016 की UKSSSC ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच में OMR शीटों को सुरक्षित कस्टडी से निकालकर निजी एजेंसी तक पहुंचाने और कथित रूप से पैसे लेकर उनमें बदलाव किए जाने जैसे आरोप सामने आए हैं। दस्तावेज के अनुसार ईडी की कार्रवाई में नकदी, सोना, महंगी घड़ियों तथा कुल 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति को सीज या फ्रीज किए जाने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी किसी युवा और उसके परिवार के भविष्य से जुड़ी होती है। यदि भर्ती प्रक्रिया में पैसे और प्रभाव का इस्तेमाल होता है तो यह केवल परीक्षा की शुचिता पर हमला नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले लाखों युवाओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ है। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। डॉ. बिंदल ने कहा कि कर्नाटक में भी कांग्रेस सरकार के एक मंत्री और उनके परिवार से संबंधित विदेशी निवेश एवं माइनिंग कारोबार को लेकर ईडी की कार्रवाई का उल्लेख सामने आया है।
उपलब्ध दस्तावेज़ के अनुसार 9 से 11 सितंबर 2026 के बीच कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली, उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े 21 ठिकानों पर कार्रवाई की गई तथा अफ्रीकी देशों की माइनिंग कंपनियों में निवेश और हिस्सेदारी से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। दस्तावेज़ में छापेमारी के दौरान 3.3 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी तथा लगभग 15 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा मिलने का भी दावा किया गया है। इन आरोपों और बरामदगी के संबंध में जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दिया जाना चाहिए और अंतिम निष्कर्ष कानून एवं जांच के आधार पर ही सामने आना चाहिए। डॉ. बिंदल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सरकारी संसाधनों, माइनिंग, ड्रेजिंग, स्टोन क्रशर और ठेकों से जुड़े अनेक मामलों पर गंभीर सवाल उठे हैं। भाजपा लगातार मांग करती आई है कि जहां भी मंत्री, सत्ता से जुड़े व्यक्ति अथवा उनके निकटस्थ लोगों पर आर्थिक हितों या नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं, वहां सरकार लीपापोती करने के बजाय दस्तावेजों को सार्वजनिक करे और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाए।
उन्होंने कहा कि ब्यास नदी में ड्रेजिंग के नाम पर माइनिंग से जुड़े मामले में भाजपा ने कई गंभीर प्रश्न उठाए हैं। बेस वैल्यू की राशि सरकार के पास जमा हुई या नहीं, आवश्यक बैंक गारंटी की स्थिति क्या है, वन विभाग के माध्यम से माइनिंग करवाने का निर्णय किस आधार पर और किस प्रक्रिया से लिया गया तथा कैबिनेट स्तर पर निर्णय लेने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई—सरकार को इन सभी सवालों का तथ्यात्मक उत्तर प्रदेश की जनता के सामने रखना चाहिए। यदि किसी स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग अथवा वित्तीय अनियमितता के प्रमाण सामने आते हैं तो सक्षम केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा भी मामले की जांच होनी चाहिए। डॉ. बिंदल ने कहा कि जयसिंहपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन स्टोन क्रशर को लेकर भी भाजपा नेताओं ने मंत्री की कथित व्यावसायिक हिस्सेदारी और नियमों के पालन पर सवाल उठाए हैं। सरकार को इन आरोपों पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संबंधित अनुमति, हिस्सेदारी, पर्यावरण स्वीकृति और अन्य सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो सरकार को जांच से घबराने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि कांग्रेस विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध और पुलिस कार्रवाई का सहारा लेने का प्रयास करती है। लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व सरकार से प्रश्न पूछना है और सरकार का दायित्व तथ्यों के साथ उत्तर देना है। भाजपा न तो दबाव में आएगी और न ही प्रदेश की जनता के धन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े सवाल उठाना बंद करेगी। डॉ. बिंदल ने कहा, “उत्तराखंड में सवाल युवाओं की भर्ती और भविष्य का है, कर्नाटक में सार्वजनिक धन और विदेशी निवेश से जुड़े आरोपों का है और हिमाचल में प्राकृतिक संसाधनों, माइनिंग, ड्रेजिंग तथा सरकारी निर्णयों की पारदर्शिता का सवाल है।
कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि वह अपने नेताओं पर उठ रहे सवालों पर वही जवाबदेही स्वीकार करेगा या नहीं, जिसकी मांग वह दूसरों से करता है। उन्होंने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि हिमाचल में जिन-जिन मामलों में भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता, नियमों की अनदेखी अथवा सत्ता के दुरुपयोग के ठोस तथ्य सामने आते हैं, उनकी समयबद्ध और निष्पक्ष जांच हो। किसी भी दोषी को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए और प्रदेश के संसाधनों की एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।