आर्थिक मुश्किलों के बीच बच्चों के सपनों को पंख दे रही इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना , 435 बच्चों को मिला लाभ 

सुंदरनगर के अंबेडकर वार्ड की भावना देवी के लिए अपने दो बच्चों की परवरिश और पढ़ाई का खर्च अकेले उठाना किसी चुनौती से कम नहीं था। गृहिणी होने के साथ-साथ एकल माता के रूप में परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटे आर्यन और बेटी आयशा की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ था। ऐसे में इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना उनके लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर आई है

Sep 13, 2026 - 16:45
Sep 13, 2026 - 17:20
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आर्थिक मुश्किलों के बीच बच्चों के सपनों को पंख दे रही इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना , 435 बच्चों को मिला लाभ 

यंगवार्ता न्यूज़ - मंडी  13-09-2026

सुंदरनगर के अंबेडकर वार्ड की भावना देवी के लिए अपने दो बच्चों की परवरिश और पढ़ाई का खर्च अकेले उठाना किसी चुनौती से कम नहीं था। गृहिणी होने के साथ-साथ एकल माता के रूप में परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटे आर्यन और बेटी आयशा की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ था। ऐसे में इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना उनके लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर आई है। भावना देवी का बेटा आर्यन छठी कक्षा में तथा बेटी आयशा आठवीं कक्षा में पढ़ती है। वह बताती हैं कि बच्चों की पढ़ाई, किताबों और अन्य आवश्यकताओं के साथ-साथ उनके पालन-पोषण का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान उन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना की जानकारी मिली। 
उन्होंने वर्ष 2024 में योजना के लिए आवेदन किया और उसी वर्ष से उन्हें योजना का लाभ मिलना शुरू हो गया। योजना के तहत उन्हें दोनों बच्चों की शिक्षा के लिए एक-एक हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता मिल रही है। वह कहती हैं कि एकल माता होने के कारण बच्चों की सभी जरूरतों को अकेले पूरा करना उनके लिए मुश्किल था, लेकिन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता ने उनकी परेशानी को काफी कम किया है। प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए भावना देवी कहती हैं, “इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना से मुझे अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण का खर्च उठाने में काफी मदद मिल रही है। इससे मुझे बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का भरोसा मिला है। मैं प्रदेश सरकार का धन्यवाद करती हूं कि जरूरतमंद परिवारों और बच्चों के लिए ऐसी कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को शिक्षा के साथ बेहतर भविष्य का अवसर मिले, इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार की इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना महत्वपूर्ण सहारा बन रही है। 
बाल विकास परियोजना अधिकारी सुंदरनगर पूनम चौहान ने बताया कि वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 53.53 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है, जिससे 435 बच्चे लाभान्वित हुए हैं। इनमें 402 बच्चों को 1000 रुपए प्रति माह तथा 33 बच्चों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए सहायता राशि प्रदान की जा रही है। पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जरूरतों के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि परिवारों को बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्चों को पूरा करने में सहायक बन रही है। योजना के तहत 18 से 27 वर्ष की आयु के पात्र युवाओं को सरकारी संस्थानों में निःशुल्क उच्च शिक्षा उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। इसमें ट्यूशन फीस, छात्रावास का खर्च और भोजन शुल्क शामिल हैं। यदि छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो व्यावसायिक पाठ्यक्रम अथवा उच्च शिक्षा के दौरान रहने के लिए पात्र विद्यार्थियों को 3000 रुपये प्रतिमाह तक किराया सहायता देने का प्रावधान है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना आवश्यक है तथा परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए। 
विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता एवं निराश्रित महिलाओं तथा 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले अभिभावकों के पात्र बच्चों को भी इसमें सहायता प्रदान की जाती है। इच्छुक पात्र परिवार अपने क्षेत्र के बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आय प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, बच्चे का आयु प्रमाण पत्र तथा माता अथवा अभिभावक की स्थिति से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं।  एसडीएम सुंदरनगर अमर नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना और इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा और विकास के समान अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाना है। विशेष रूप से बेटियों के लिए उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होने से उनके आत्मनिर्भर बनने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

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