यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 14-05-2026
तत्कालीन क्योंथल रियायत के मुख्यालय जुन्गा में करीब आठ सदी पुराने राजमहल के जीर्णोद्धार का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। गौर रहे कि बीते सात जनवरी को इस प्राचीन राजमहल में आग लग जाने से इसका एक हिस्सा पूर्ण रूप से नष्ट हो गया था। जिसमे देव जुन्गा सहित चार मंदिरों असाधारण मूर्तियां आग की लपटों से पिघल कर नष्ट हो गई थी। क्योेंथल धरोहर पुरातात्विक संस्कृति और देवालय जीर्णांद्धार समिति के अध्यक्ष पंकज सेन ने बताया कि राजमहल के जीर्णोंद्धार में क्योंथल रियासत की प्रजा का सबसे ज्यादा योगदान रहा है।
जिनके द्वारा आग की भेंट चढ़े राजमहल के भीतर से देव जुन्गा सहित चार मंदिरों से देवताओं के मोहरे निकालने और इसका मलवा को ठिकाने लगाने में अतुलनीय श्रमदान दिया गया है। उन्होने बताया कि तत्कालीन क्योंथल रियासत में जितने भी देव जुन्गा के 22 टीका की देवठियां हैं। इन सभी क्षेत्रों के कलैणो ने क्रमवार इस राजमहल में निर्मित किए जाने वाले चार मंदिरों अपना श्रमदान देने के साथ वितीय सहायता भी प्रदान की गई है। पंकज सेन ने बताया कि राजमहल से मलवा निकालने का कार्य बीते नवरात्रों में पूर्ण कर दिया गया है।
राजमहल के भीतर पूर्व की भांति देव जुन्गा के अतिरिक्त माता तारा देवी, महावीर और चौथा ईष्ट के मंदिर निर्मित किए जा रहे हैं जिसके लिए मंडी जिला से मिस्त्री लाए गए है जोकि मंदिरों की प्राचीन शैली का निर्माण करने में निपुण है। उन्होने बताया कि राजमहल के भीतर बनने वाले चार मंदिरों के जीर्णोंद्धार पर करीब 7-8 करोड़ का खर्च होने की संभावना है। उन्होने आमजन से इन प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार में वित्तीय रूप से योगदान देने की अपील की गई है ताकि प्राचीन मंदिरों की धरोहर का संरक्षण हो सके।