आईजीएमसी में गैस संकट से 'भूख' की इमरजेंसी,तीमारदार मरीज को देखें या खाना ढूंढने जाएं 

शिमला में गैस संकट से जहां इसका असर पहले ढाबे और होटल कारोबार में देखने को मिल रहा था वहीं अब गैस संकट से स्वास्थ्य सुविधाये भी प्रभावित होने लग पड़ी हैं। हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल IGMC में गैस संकट के कारण कैंटीन के चूल्हे ठप्प पड़ गए

Mar 15, 2026 - 15:58
 0  14
आईजीएमसी में गैस संकट से 'भूख' की इमरजेंसी,तीमारदार मरीज को देखें या खाना ढूंढने जाएं 
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    15-03-2026

शिमला में गैस संकट से जहां इसका असर पहले ढाबे और होटल कारोबार में देखने को मिल रहा था वहीं अब गैस संकट से स्वास्थ्य सुविधाये भी प्रभावित होने लग पड़ी हैं। हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल IGMC में गैस संकट के कारण कैंटीन के चूल्हे ठप्प पड़ गए है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की उपलब्धता न होने के कारण अस्पताल को कैंटीन में मरीज व तीमारदारों को खाना नही मिल रहा है।

जिससे एक प्रकार की खाने पर एमरजेंसी लग गयी है।और इस एमरजेंसी के कारण मरीज व तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों मरीजों और उनके तीमारदारों को इलाज के साथ-साथ अब भूख से भी लड़ना पड़ रहा है। अस्पताल की कैंटीन में पिछले कई दिनों से रसोई गैस (LPG) सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण खाने-पीने की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

कैंटीन संचालक महेंद्र चौहान, जो पिछले 25 वर्षों से यहाँ सेवाएं दे रहे हैं,का कहना है कि  उनके कार्यकाल में पहली बार इस तरह की गंभीर किल्लत पैदा हुई है। उन्होंने कहा, "हमने कोविड जैसी वैश्विक महामारी के दौरान भी कैंटीन को बंद नहीं होने दिया था, लेकिन आज सिलेंडरों की किल्लत के कारण काम ठप पड़ा है।

उन्होंने बताया कि इस कैंटीन पर न केवल मरीज और उनके साथ आए तीमारदार निर्भर हैं, बल्कि बड़ी संख्या में डॉक्टर्स भी यहाँ भोजन के लिए आते हैं। गैस न होने से 8 से 10 कर्मचारियों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो गया है और प्रतिदिन भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।​

संचालक महेंद्र चौहान ने बताया कि उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और जिला प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी है। उन्होंने गुहार लगाई है कि अस्पताल की संवेदनशीलता को देखते हुए गैस की सुचारू आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए, ताकि मरीजों और तीमारदारों को और अधिक असुविधा का सामना न करना पड़े।

दूर-दराज से आए तीमारदारों की भी मुश्किलें बढ़ गए हैं।ऊना से अपनी माता का इलाज करवाने आईं सोनू ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि मरीज को अकेला छोड़कर बाहर लक्कड़ बाजार या अन्य स्थानों पर खाना ढूंढना नामुमकिन है। 

कैंटीन में गरम पानी, दूध और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी न होने से तीमारदारों को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। अस्पताल पहुंचे अन्य लोगों का भी कहना है कि प्रशासन को कम से कम स्वास्थ्य संस्थानों में तो पुख्ता इंतजाम रखने चाहिए। प्रशासन और IOC से जल्द समाधान की मांग करते हैं। 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow