हिमाचल में बसेंगे 3 नए आधुनिक शहर; 'लैंड पूलिंग' के जरिए 1 साल में शुरू होगा 'हिम चंडीगढ़' प्रोजेक्ट

हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में शहरीकरण, आवास और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए एक मेगा प्लान पर काम कर रही है।  शनिवार को कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने हिमुडा (HIMUDA) की समीक्षा बैठक बुलाई जिसमे कई एहम फैसले लिए गए।

May 16, 2026 - 16:39
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हिमाचल में बसेंगे 3 नए आधुनिक शहर; 'लैंड पूलिंग' के जरिए 1 साल में शुरू होगा 'हिम चंडीगढ़' प्रोजेक्ट
शिमला 16 मई, 2026 : 

 हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में शहरीकरण, आवास और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए एक मेगा प्लान पर काम कर रही है।  शनिवार को कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने हिमुडा (HIMUDA) की समीक्षा बैठक बुलाई जिसमे कई एहम फैसले लिए गए। प्रदेश में तीन नए आधुनिक शहर जल्द विकसित करने का फैसला लिया गया , जिनमें 'हिम चंडीगढ़', 'हिम पंचकूला' और कांगड़ा में एक नई सिटी शामिल है।इन शहरों में हाईटेक सुविधाएं मुहैय्या करवाई जाएगी

 मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि  हिमुडा की समीक्षा बैठक में इस साल का अपेक्षित टर्नओवर से अधिक रखने का लक्ष्य है जो कि पिछले वर्ष के 125 करोड रुपए से दोगुना है । उन्होंने बताया कि प्रदेश में 'हिम चंडीगढ़' और 'हिम पंचकूला' की तर्ज पर 3 नई अत्याधुनिक (High-End) सिटीज (Townships) बसाई जाएंगी।

राजेश धर्माणी ने बताया कि इस साल हिमुडा का अपेक्षित टर्नओवर ₹250 करोड़ से अधिक रखने का लक्ष्य है, जो कि पिछले वर्ष के ₹125 करोड़ के मुकाबले सीधा दोगुना है। नए शहरों को वैश्विक स्तर  पर विकसित करने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर के सलाहकारों (International Consultants) की सेवाएं लेने जा रही है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में तीन नए आधुनिक शहर विकसित होंगे, जिनमें 'हिम चंडीगढ़', 'हिम पंचकूला' और कांगड़ा में एक नई सिटी शामिल है।
​ मंत्री धर्माणी ने भरोसा जताया कि बेहद महत्वपूर्ण 'हिम चंडीगढ़' प्रोजेक्ट पर आगामी एक वर्ष के भीतर धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।इन शहरों का लेआउट और सुविधाएं बिल्कुल आधुनिक और हाई-टेक होंगी।
​राजेश धर्माणी  ने माना कि राज्य में उद्योगों और हाउसिंग के लिए जमीन का अधिग्रहण एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।फिलहाल हमारे पास करीब 7,000 बीघा जमीन उपलब्ध है, लेकिन बड़े प्रोजेक्ट्स के लिहाज से यह काफी नहीं है। इसमें से भी ज्यादातर जमीन सिर्फ बद्दी क्षेत्र में केंद्रित है। अन्य स्थानों पर हमारे पास मात्र 200 से 300 बीघा जमीन ही है, जो औद्योगिक जरूरतों के लिए बेहद कम है।"​इस कमी को दूर करने के लिए सरकार दो रणनीतियों पर काम कर रही है:
​आपसी सहमति से जमीन मालिकों के साथ आपसी सहमति से तय दरों पर भूमि खरीदना। जमीन मालिकों को प्रोजेक्ट में भागीदार बनाकर 'लैंड पूलिंग' नीति के माध्यम से सुचारू अधिग्रहण करना।
​उन्होंने कहा कि शिमला, सोलन और धर्मशाला में पहले से ही कई योजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा अब सिरमौर, बिलासपुर, कुल्लू-मंडी और कांगड़ा में नई हाउसिंग कॉलोनियों और इंडस्ट्रियल एरिया के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Procurement) का काम तेजी से जारी है।
 

वही  कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने आगामी चुनावों को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर जनता से मिल रहा रिस्पॉन्स बेहद सकारात्मक है। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस पार्टी बहुत अच्छे अंतर से सीटें हासिल करेगी और इस बार का चुनावी प्रदर्शन पिछले चुनावों के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत रहेगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने तेल डीजल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न होने वाले संकटों और उनके प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार समय रहते कदम उठाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है, जिसका खामियाजा अब देश की आम जनता और विकास कार्यों को भुगतना पड़ रहा है।​राजेश धर्माणी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दूरदर्शिता की तारीफ करते हुए कहा कि वे लंबे समय से इन मुद्दों पर सरकार को सचेत कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनके सुझावों को हमेशा राजनीतिक चश्मे से देखा

​उन्होंने कहा कि हमारे नेता और संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शुरू से ही यह बात कह रहे थे कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस संघर्ष और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज'  की नाकेबंदी  के कारण आम जनमानस पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। लेकिन भारत सरकार इस सच को स्वीकार करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। अब इसका गंभीर प्रभाव धरातल पर दिखना शुरू हो गया है।
​धर्माणी ने प्रधानमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि राहुल गांधी जब भी कोई मुद्दा उठाते हैं, वह हमेशा देशहित में होता है। सरकार को इसे महज राजनीतिक विरोध न मानकर गंभीरता से लेना चाहिए और समस्याओं पर पहले से ही सक्रिय  होकर काम करना चाहिए।

​धर्माणी ने बताया कि अगर केंद्र सरकार ने समय रहते सही कदम उठाए होते, तो आज पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की कीमतों में इस तरह का बेतहाशा उछाल नहीं आता। महंगाई के साथ-साथ अब देश और प्रदेश में जरूरी चीजों की भारी किल्लत शुरू हो गई है।

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