श्रम कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उत्तरी सीटू , डीसी कार्यालय के बाहर किया धरना प्रदर्शन 

सीटू राष्ट्रीय जनरल काउंसिल के आह्वान पर ठेका , आउटसोर्स , कैजुअल , मल्टी टास्क , मल्टी पर्पज व फिक्स टर्म कर्मियों की मांगों को लेकर सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश द्वारा जिला व ब्लॉक मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन किए गए। प्रदेशभर में हुए प्रदर्शनों में हजारों मजदूरों ने भाग लिया। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों व प्रतिष्ठानों, निजी तथा सरकारी सेवाओं में कार्यरत ठेका , आउटसोर्स , कैजुअल , मल्टी टास्क , मल्टी पर्पज व फिक्स टर्म मजदूरों को आमतौर पर समान और एक जैसा काम करने के बावजूद नियमित मजदूरों से बहुत कम वेतन दिया जाता है। उन्हें कानूनी रूप से मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा व आय लाभों से वंचित रखा जाता है

Oct 1, 2024 - 00:48
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श्रम कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उत्तरी सीटू , डीसी कार्यालय के बाहर किया धरना प्रदर्शन 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  30-09-2024
सीटू राष्ट्रीय जनरल काउंसिल के आह्वान पर ठेका , आउटसोर्स , कैजुअल , मल्टी टास्क , मल्टी पर्पज व फिक्स टर्म कर्मियों की मांगों को लेकर सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश द्वारा जिला व ब्लॉक मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन किए गए। प्रदेशभर में हुए प्रदर्शनों में हजारों मजदूरों ने भाग लिया। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों व प्रतिष्ठानों, निजी तथा सरकारी सेवाओं में कार्यरत ठेका , आउटसोर्स , कैजुअल , मल्टी टास्क , मल्टी पर्पज व फिक्स टर्म मजदूरों को आमतौर पर समान और एक जैसा काम करने के बावजूद नियमित मजदूरों से बहुत कम वेतन दिया जाता है। उन्हें कानूनी रूप से मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा व आय लाभों से वंचित रखा जाता है। 
ठेका , आउटसोर्स , कैजुअल , मल्टी टास्क , मल्टी पर्पज व फिक्स टर्म मजदूरों की भर्ती में एक ओर राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों व कंपनियों की कमीशनखोरी बढ़ी है वहीं दूसरी ओर इन कर्मचारियों पर शोषण का शिकंजा मजबूत हुआ है। इन कर्मचारियों का भारी शोषण हो रहा है। इन कर्मचारियों को स्थाई कर्मचारियों के मुकाबले बेहद कम वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों से 8 के बजाए 12 घंटे कार्य लिया जाता है। इनके लिये इपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, पेंशन, बोनस, छुट्टियों आदि की सुविधा लागू नहीं की जाती है। इनके लिए मेडिकल सुविधा कर कोई प्रावधान नहीं है। केंद्र की मोदी सरकार के पिछले दस वर्ष के कार्यकाल में स्थाई नौकरियों में भारी कटौती हुई है तथा कॉन्ट्रैक्ट , आउटसोर्स , फिक्स टर्म प्रणाली पर रोजगार का बोलबाला बढ़ा है। इस से कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ी है। हिमाचल प्रदेश की भूतपूर्व भाजपा सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने का वायदा कर इन्हें ठगती रही व वर्तमान कांग्रेस सरकार भी इन कर्मचारियों के प्रति संवेदनहीन रही है व इन्हें नौकरी से निकालने की साजिश रचती रही है। 
हि. प्र. सरकार द्वारा सरकारी संस्थानों व सेवाओं में मल्टी टास्क व मल्टी पर्पज के आधार पर कर्मियों को न्यूनतम वेतन से भी बेहद कम साढ़े चार हजार से लेकर छः हजार रुपए पर नियुक्त करना उसके शोषणकारी चरित्र को दर्शाता है। ठेका , आउटसोर्स , कैजुअल , मल्टी टास्क , मल्टी पर्पज व फिक्स टर्म मजदूरों के लिए छुट्टियों , पैन्शन , ग्रेच्युटी , ईपीएफ , ईएसआई , मेडिकल , बोनस, ओवर टाईम वेतन , श्रम कानून व आठ घंटे की ड्यूटी आदि सभी प्रकार की सुविधाएं लागू की जाएं। सन् 1957 के 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों, सन् 1992 के रेप्टाकोस ब्रेट एंड कम्पनी लिमिटेड के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए सम्मानजनक वेतन हेतु पारित आदेश तथा जस्टिस माधुर की अध्यक्षता में बने 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के मध्यनज़र ठेका , आउटसोर्स , कैजुअल , मल्टी टास्क , मल्टीपर्पज व फिक्स टर्म मजदूरों को 26.000 न्यूनतम वेतन दिया जाए। 
शिमला के डीसी ऑफिस पर हुए प्रदर्शन में विजेंद्र मेहरा, रमाकांत मिश्रा, बालक  राम, विनोद बिरसांटा, प्रताप, विक्रम, दलीप, पंकज, वीरेंद्र लाल, नोख राम, सीता राम, निशा, सरीना, सुरेंद्रा, उमा, प्रवीण, सन्नी, चमन, कृतिका, राम प्रकाश, पाला राम, दलविंद्र, शिव राम, विवेक कश्यप, रंजीव कुठियाला सहित आईजीएमसी, कमला नेहरू, अटल इंस्टीट्यूट चम्याना, मेंटल रिहैबिलिटेशन सेंटर अस्पतालों, छः सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों, सैहब, कालीबाड़ी, विशाल मेगामार्ट, बॉर्डर  रोड़ ऑर्गेनाइजेशन से संबंधित ठेका,कैजुअल व आउटसोर्स कर्मियों सहित होटल, तहबजारी आदि से जुड़े मजदूरों ने भारी संख्या में भाग लिया।

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