यंगवार्ता न्यूज - नाहन 27 जुलाई, 2026 :
कृषि विज्ञान केंद्र, सिरमौर में एग्री फोटोवोल्टिक (कृषि-सौर ऊर्जा) प्रणाली विषय पर जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया. भारतीय कृषि कौशल परिषद (एएससीआई), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सिरमौर जिले के किसानों को कृषि के साथ-साथ सौर ऊर्जा उत्पादन के एकीकृत मॉडल से परिचित कराना और भूमि उपयोग की दक्षता बढ़ाना था।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि एग्री फोटोवोल्टिक तकनीक के माध्यम से कृषि योग्य भूमि का बहुआयामी उपयोग संभव है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय एवं सौर ऊर्जा की तरफ बढ़ना समय की आवश्यकता है। इस तकनीक में फसलों को प्रभावित किए बिना खेतों में सौर पैनल लगाए जाते हैं, जिससे किसान अपनी विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं।
डॉ. पंकज मित्तल ने आगे जानकारी दी कि कृषि सौर ऊर्जा प्रणाली में एक ही भूमि पर कृषि उत्पादन एवं सौर ऊर्जा उत्पादन दोनों कार्य एक साथ किए जाते हैं। इसके अंतर्गत सौर पैनलों को फसलों के ऊपर अथवा उनके बीच इस प्रकार स्थापित किया जाता है कि फसलों को आवश्यक सूर्य प्रकाश मिलता रहे और साथ ही स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन भी हो। यह प्रणाली भूमि उपयोग दक्षता बढ़ाने के साथ किसानों को कृषि उपज एवं विद्युत उत्पादन दोनों से आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करती है।फोटोवोल्टिक तकनीक के माध्यम से कृषि योग्य भूमि का बहुआयामी उपयोग संभव है और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन किसानों में सही जानकारी के अभाव को दूर करने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन बेहद उपयोगी एवं महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सिरमौर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 50 प्रगतिशील किसानों का आह्वान किया कि वे इस तकनीक को अपनाएं और अपने क्षेत्रों में अन्य किसानों को भी इसके बारे में जागरूक करें।
कार्यशाला में भारतीय कृषि कौशल परिषद, नई दिल्ली से पहुंचे वरिष्ठ विशेषज्ञ रिचर्ड मनु ने अपने सहयोगी रवि दहिया के साथ किसानों को एग्री फोटोवोल्टिक के व्यावहारिक और आर्थिक पहलुओं से अवगत कराया। रिचर्ड मनु ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों में सफल आयोजन के बाद सिरमौर के किसानों को भी जागरूक करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है क्योंकि पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय एवं सौर ऊर्जा की तरफ बढ़ना समय की आवश्यकता है। इस तकनीक में फसलों को प्रभावित किए बिना खेतों में सौर पैनल लगाए जाते हैं, जिससे किसान अपनी विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में किसान इस प्रणाली को अपनाकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर रहे हैं क्योंकि इससे तापमान व गर्मी का प्रभाव नियंत्रित होता है, मिट्टी व पौधों से जल की हानि कम होती है तथा फसलें अत्यधिक गर्मी, भारी वर्षा, पाला एवं अन्य जलवायु संबंधी चुनौतियों से बेहतर सुरक्षा प्राप्त करती हैं। विशेषज्ञों ने किसानों को मार्गदर्शन के लिए प्रश्न-उत्तर सत्र और प्रतिक्रिया पत्रक के माध्यम से भविष्य में निरंतर संपर्क और तकनीकी सहयोग का आश्वासन दिया।