एसएफआई ने फीस वृद्धि और प्रशासनिक शुल्कों में भारी बढ़ोतरी की निंदा करते हुए फैसला तुरंत वापस न लेने पर उग्र राज्यव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय  कैंपस कमेटी ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सामान्य फीस, परिक्षा शुल्क, हॉस्टल शुल्क और विभिन्न प्रशासनिक मदों में की गई 25 प्रतिशत की मनमानी और अप्रत्याशित वृद्धि के जनविरोधी तथा छात्र-विरोधी निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। एसएफआई ने इस फैसले को सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली के लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और सुलभ स्वरूप पर सीधा हमला करार दिया है

Aug 3, 2026 - 13:57
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एसएफआई ने फीस वृद्धि और प्रशासनिक शुल्कों में भारी बढ़ोतरी की निंदा करते हुए फैसला तुरंत वापस न लेने पर उग्र राज्यव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी
यंगवार्ता न्यूज - शिमला 3 अगस्त : 

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय  कैंपस कमेटी ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सामान्य फीस, परिक्षा शुल्क, हॉस्टल शुल्क और विभिन्न प्रशासनिक मदों में की गई 25 प्रतिशत की मनमानी और अप्रत्याशित वृद्धि के जनविरोधी तथा छात्र-विरोधी निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। एसएफआई ने इस फैसले को सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली के लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और सुलभ स्वरूप पर सीधा हमला करार दिया है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्थापना राज्य के दूर-दराज, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन का यह तुगलकी फरमान शिक्षा को एक व्यापारिक वस्तु बनाकर इसे केवल अमीर और संपन्न वर्ग की पहुंच तक सीमित करने की एक सोची-समझी साजिश है जिससे राज्य के हजारों मेधावी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित होने की कगार पर आ जाएंगे।

विश्वविद्यालय एसएफआई ईकाई ने प्रशासन  को संसाधन के नाम पर बैकल्पिक ज्ञापन पत्र भी सौंपा था तथा एसएफआई के पदाधिकारियों ने प्रशासन के वित्तीय कुप्रबंधन और तानाशाही रवैये का पर्दाफाश किया। संगठन ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि स्नातकोत्तर  के तमाम पाठ्यक्रमों जैसे एम.ए., एम.एससी., एम.कॉम., एलएल.बी., एम.टेक. और एमबीए सहित शोधार्थियों की थीसिस विस्तार फीस, प्रोजेक्ट मूल्यांकन शुल्क, री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) फीस, डिग्री जारी करने के शुल्क, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और लेट फीस के नाम पर 25 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी थोप दी गई है। इसके अतिरिक्त हॉस्टल मेंटेनेंस और सुरक्षा शुल्कों में भी अनुचित वृद्धि की गई है। यह सब कुछ यह साबित करता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन एक जन-कल्याणकारी शैक्षणिक संस्थान को लाभ कमाने वाली व्यापारिक इकाई में तब्दील करने पर आमादा है।

एसएफआई ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी बजटीय विफलताओं और वित्तीय घाटे का बोझ गरीब छात्रों की जेब पर डाल रहे हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार से पर्याप्त गैर-योजनागत अनुदान  और विशेष वित्तीय सहायता हासिल करने में पूरी तरह नाकाम रहा विश्वविद्यालय प्रशासन अब अपनी प्रशासनिक लाचारी को छिपाने के लिए छात्रों को 'दुधारू गाय' समझकर मनमाने शुल्क वसूलना चाहता है। एक तरफ जहां हिमाचल प्रदेश का आम नागरिक पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय का यह फैसला ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों, मजदूरों और मध्यमवर्गीय परिवारों के अभिभावकों की कमर तोड़ने वाला है। यह न केवल छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर अनिश्चितता का बादल गहराता है, बल्कि राज्य में ड्रॉप-आउट दर को भी बढ़ावा देने वाला कदम है।

इन तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, एसएफआई एचपीयू कैंपस कमेटी विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार से स्पष्ट मांग करती है कि 25 प्रतिशत बढ़ाई गई सभी शैक्षणिक, परीक्षा, हॉस्टल व प्रशासनिक फीस को तुरंत प्रभाव से शून्य किया जाए। साथ ही, पुनर्मूल्यांकन, थीसिस सबमिशन और डिग्री शुल्क में की गई अनियंत्रित बढ़ोतरी को अविलंब वापस लिया जाए। राज्य सरकार को चाहिए कि वह विश्वविद्यालय के वित्तीय संकट को हल करने के लिए तुरंत विशेष वित्तीय पैकेज जारी करे और विश्वविद्यालय के बजटीय प्रबंधन पर एक पारदर्शी श्वेत पत्र  जनता के सामने रखे। एसएफआई यह साफ कर देना चाहती है कि शिक्षा का अधिकार कोई खैरात नहीं है, बल्कि यह देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जिसकी रक्षा के लिए संगठन अंतिम सांस तक लड़ेगा।

अंत में, एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए घोषणा की है कि यदि फीस वृद्धि के इस जनविरोधी फैसले को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता है, तो संगठन पूरे राज्य में एक उग्र और चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। इसके तहत परिसर के सभी विभागों में व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाने, कुलपति और कुलसचिव का घेराव करने, पुतला दहन करने, क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठने और पूरे समरहिल परिसर में कक्षाओं के पूर्ण बहिष्कार का रास्ता अपनाया जाएगा। यदि प्रशासन फिर भी अपनी हठधर्मिता पर अड़ा रहता है, तो एसएफआई प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेजों और संबद्ध संस्थानों को एकजुट कर राज्यव्यापी 'हिमाचल विश्वविद्यालय बंद' का आह्वान करेगी। इस आंदोलन के दौरान परिसर में उत्पन्न होने वाले किसी भी अकादमिक, प्रशासनिक या कानून-व्यवस्था से जुड़े संकट की संपूर्ण और सीधी जिम्मेदारी केवल विश्वविद्यालय प्रशासन तथा राज्य सरकार की होगी।

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