केंद्र और प्रदेश सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष होगा तेज : विजय मेहरा

मजदूरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और आगामी आंदोलनों की रूपरेखा तय करने के लिए आज सीटू जिला कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों पर चर्चा के साथ-साथ आगामी कार्यक्रमों को लेकर रणनीति भी बनाई गई। मीडिया से बात करते हुए सीटू राज्य कमेटी के अध्यक्ष विजय मेहरा ने बताया कि बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई और श्रमिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक के दौरान 10 अगस्त को आयोजित होने वाले जेल भरो आंदोलन को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई। 

Jul 12, 2026 - 17:45
Jul 12, 2026 - 17:57
 0  9
केंद्र और प्रदेश सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष होगा तेज : विजय मेहरा

यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन 12-07-2026
मजदूरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और आगामी आंदोलनों की रूपरेखा तय करने के लिए आज सीटू जिला कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों पर चर्चा के साथ-साथ आगामी कार्यक्रमों को लेकर रणनीति भी बनाई गई। मीडिया से बात करते हुए सीटू राज्य कमेटी के अध्यक्ष विजय मेहरा ने बताया कि बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई और श्रमिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक के दौरान 10 अगस्त को आयोजित होने वाले जेल भरो आंदोलन को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई। 
इसके अलावा 25 जुलाई को शिमला में होने वाले राज्य स्तरीय अधिवेशन और 29 जुलाई को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय अधिवेशन को लेकर भी चर्चा हुई। राज्य अध्यक्ष विजय मेहरा ने बताया कि शिमला में होने वाले राज्य स्तरीय अधिवेशन में प्रदेशभर के दर्जनों मजदूर संगठन हिस्सा लेंगे और श्रमिकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। इससे पूर्व बैठक को संबोधित करते हुए सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला प्रभारी जगत राम तथा जिला महासचिव आशीष कुमार ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार देश की संपत्ति को मुट्ठी भर बड़े पूंजीपतियों के हवाले करने में लगी हुई है। एक और सार्वजनिक उद्योग, बैंक, बीमा, बिजली, परिवहन और प्राकृतिक संसाधनों का निजीकरण किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। सरकार की आर्थिक नीतियों का पूरा बोझ मेहनतकश जनता पर डाला जा रहा है। 
 
 
 
 
 
नेताओं ने कहा कि चार लेबर कोड श्रमिकों के दशकों लंबे संघर्षों से हासिल अधिकारों को छीनने का हथियार हैं। इन कानूनों के जरिए कार्यदिवस बढ़ाने, यूनियन अधिकारों को सीमित करने, छंटनी को आसान बनाने और सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। सीटू इन चारों लेबर कोडों को तत्काल वापस लेने की मांग करती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौते ( FTA ) भारतीय कृषि, विशेषकर हिमाचल प्रदेश के सेब, बागवानी और अन्य कृषि उत्पादों पर सीधा हमला हैं। सस्ते विदेशी आयात से किसानों की फसलों के दाम गिरेंगे, ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट आएगा। सरकार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बजाय देश के किसानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए। 
 
 
 
 
बैठक में कहा गया कि लगातार पहले मनरेगा बजट घटाया गया और मनरेगा को खत्म करके  ग्रामीण गरीबों का रोजगार छीन लिया गया है। सीटू ने मनरेगा को बहाल  करने, कम से कम 200 दिन का रोजगार, ₹600 प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी, समय पर भुगतान और शहरी रोजगार गारंटी कानून लागू करने की मांग की। बैठक ने मांग की कि बढ़ती महंगाई पर रोक लगाई जाए, आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित की जाए, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाया जाए, निजीकरण पर रोक लगे, ठेका प्रथा समाप्त की जाए, समान काम के लिए समान वेतन लागू किया जाए, सभी योजना कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा और सम्मानजनक वेतन दिया जाए तथा सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow