मुखौटा निर्माण एवं नृत्य प्रशिक्षण की हुई समीक्षा, गोपाल हाब्बी द्वारा दिए गए मुखौटा प्रशिक्षण का हुआ मूल्यांकन

उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार से सम्मानित युवा लोककलाकार गोपाल हाब्बी ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि हाब्बी मानसिंह कला केन्द्र, जालग में संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली द्वारा संचालित कला दीक्षा श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित मुखौटा निर्माण एवं मुखौटा नृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल्यांकन किया गया।

Jun 7, 2026 - 18:12
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मुखौटा निर्माण एवं नृत्य प्रशिक्षण की हुई समीक्षा, गोपाल हाब्बी द्वारा दिए गए मुखौटा प्रशिक्षण का  हुआ मूल्यांकन

यंगवार्ता न्यूज राजगढ़ 7 जून, 2026 : 


उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार से सम्मानित युवा लोककलाकार गोपाल हाब्बी ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि हाब्बी मानसिंह कला केन्द्र, जालग में संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली द्वारा संचालित कला दीक्षा श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित मुखौटा निर्माण एवं मुखौटा नृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल्यांकन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम गुरु-शिष्य परम्परा के अंतर्गत मई 2024 से मई 2025 तक गुरु गोपाल सिंह हाब्बी के मार्गदर्शन में संचालित किया गया था।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सहगुरू अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोककलाकार एवं वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डा. जोगेन्द्र हाब्बी तथा संगतकार के रूप में प्रसिद्ध लोकगायक रामलाल वर्मा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। प्रशिक्षण में युवा कलाकारों को पारम्परिक मुखौटा निर्माण की तकनीकों तथा विभिन्न मुखौटा नृत्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के मूल्यांकन हेतु संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली की ओर से कला दीक्षा के प्रभारी दीपक जोशी, रविन्द्र किरार एवं नरवीर सिंह पझौता के जालग गांव में स्थित हाब्बी मानसिंह कला केन्द्र, जालग पहुँचे। मूल्यांकन समिति में पझौता स्वतंत्रता सैनानी समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं पहाड़ी कलाकार संघ के वरिष्ठ सदस्य जय प्रकाश चौहान, वरिष्ठ लोकनर्तक एवं लोकनाट्य अभिनेता चेतराम ठाकुर तथा प्रदेश के प्रसिद्ध लोकगायक धर्मपाल ठाकुर शामिल रहे।

इस अवसर पर पूर्व जिला परिषद सदस्या एवं कवयित्री शकुन्तला प्रकाश, शोधार्थी अजय ठाकुर, अनेक वरिष्ठ लोककलाकार तथा क्षेत्र के गणमान्य भी उपस्थित रहे। समिति के विशेषज्ञों ने गोपाल हाब्बी के मार्गदर्शन में संचालित मुखौटा निर्माण एवं मुखौटा नृत्य प्रशिक्षण का मूल्यांकन किया। प्रशिक्षु कलाकारों ने समिति के समक्ष पारम्परिक शैली में मुखौटे तैयार कर अपनी कला दक्षता का प्रदर्शन किया तथा सिंहटू और डग्याली नाच जैसे पारम्परिक मुखौटा नृत्यों की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।

कला दीक्षा योजना के इंचार्ज दीपक जोशी ने बताया कि कला दीक्षा श्रृंखला के अंतर्गत गुरु-शिष्य परम्परा के माध्यम से देशभर में लगभग अस्सी गुरु विभिन्न लोक एवं पारम्परिक कलाओं का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। इनमें नृत्य, गायन, वादन, लोक वाद्ययंत्र निर्माण, पुतुल कला तथा मुखौटा निर्माण जैसी महत्वपूर्ण विधाएँ शामिल हैं।
हिमाचल प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत पद्मश्री विद्यानंद सरैक द्वारा लोकनृत्य एवं लोकनाट्य तथा गोपाल हाब्बी द्वारा मुखौटा निर्माण एवं मुखौटा नृत्य की विधाओं का प्रशिक्षण युवा कलाकारों को प्रदान किया गया।

उन्होंने कहा कि मुखौटों का हमारी लोक संस्कृति में विशेष महत्व रहा है। सदियों से विभिन्न लोकनाट्यों और लोकनृत्यों में मुखौटों का प्रयोग किया जाता रहा है, किन्तु समय के साथ पारम्परिक मुखौटा निर्माण की कला तथा उससे जुड़े अनेक नृत्य रूप धीरे-धीरे विलुप्त होने लगे। इसके पीछे कुशल कारीगरों की कमी तथा युवाओं की घटती रुचि प्रमुख कारण रहे हैं।

गोपाल हाब्बी ने कहा कि हाब्बी मानसिंह कला केन्द्र का उद्देश्य ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है जो नृत्य, गायन और वादन के साथ-साथ पारम्परिक मुखौटा निर्माण की कला में भी पारंगत हो। उन्होंने संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अकादेमी के सहयोग से क्षेत्र की विलुप्तप्राय मुखौटा निर्माण एवं मुखौटा नृत्य परम्परा को संरक्षित करने तथा युवा कलाकारों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ है। यह प्रयास हमारी लोक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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