कौड़ी केवल एक खेल नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर

अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला-2026 के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय कौड़ी प्रतियोगिता का शुभारंभ आज शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कौड़ी केवल एक खेल नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।

Jul 29, 2026 - 17:16
 0  11
कौड़ी केवल एक खेल नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर
यंगवार्ता न्यूज - चम्बा, 29 जुलाई, 2026 : 
अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला-2026 के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय कौड़ी प्रतियोगिता का शुभारंभ आज शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कौड़ी केवल एक खेल नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। हजारों वर्षों के इतिहास से जुड़े इस पारंपरिक खेल को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जब हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ था, तब प्रदेश की अलग पहचान का सबसे बड़ा आधार यहां की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराएं और विरासत थीं। इसलिए हमारी संस्कृति और पारंपरिक खेलों को जीवित रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चम्बा ही नहीं, बल्कि शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भी अलग-अलग स्वरूपों में इस प्रकार के पारंपरिक खेल खेले जाते रहे हैं। सरकार ऐसे खेलों के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक पहचान दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित मेलों में से एक है और ऐसे ऐतिहासिक मेले में कौड़ी जैसी पारंपरिक खेल प्रतियोगिता का आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कोड़ी खेल एसोसिएशन द्वारा इस खेल को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए अध्यक्ष डॉ. संजीव सूरी एवं पूरी टीम को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में जिला चम्बा की 128 टीमें और 700 से अधिक खिलाड़ी भाग ले रहे हैं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला तथा अब तक के इतिहास में पहली बार कोड़ी खेल की इतनी विशाल जिला स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इससे इस पारंपरिक खेल को नई ऊर्जा और नई पहचान मिलेगी।
शिक्षा मंत्री ने कौड़ी खेल एसोसिएशन को अपनी ऐच्छिक निधि से 52 हज़ार रुपए देने की घोषणा करते हुए कहा कि यह राशि प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए प्रदान की गई है। 
इस अवसर पर विधायक नीरज नैयर ने कहा कि खेल युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के साथ-साथ अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पारंपरिक खेलों के संरक्षण और खिलाड़ियों को हरसंभव प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भी कौड़ी खेल एसोसिएशन को 11 हज़ार रुपए देने की घोषणा की।
उल्लेखनीय है कि कौड़ी जिला चम्बा का एक अत्यंत लोकप्रिय एवं रोमांचक पारंपरिक खेल है, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ खेला जाता है। इस खेल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें आयु की कोई सीमा नहीं होती। लगभग 8 वर्ष से 60 वर्ष तक का कोई भी व्यक्ति इसमें भाग ले सकता है। यह खेल चार-चार खिलाड़ियों की दो टीमों के बीच खेला जाता है तथा जिस स्थान पर यह खेल खेला जाता है, उसे स्थानीय बोली में "दाँ" कहा जाता है।
कौड़ी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, रणनीति, धैर्य और टीम भावना का प्रतीक है। इसे खेलने में जितना आनंद खिलाड़ियों को आता है, उतना ही रोमांच दर्शकों को भी होता है। हर दांव के साथ मुकाबला और अधिक रोमांचक होता जाता है, जिससे पूरा वातावरण उत्साह से भर उठता है।
इस अवसर पर पूर्व विधायक सुरेंद्र भारद्वाज, उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल, पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी, उपनिदेशक उच्च शिक्षा विकास महाजन, कोड़ी खेल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजीव सूरी, एसोसिएशन के पदाधिकारी, खिलाड़ी तथा बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow