ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश में बीपीएल परिवारों की पहचान के लिए सर्वेक्षण के चौथा चरण की प्रक्रिया शुरू  

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश में बीपीएल परिवारों की पहचान के लिए सर्वेक्षण के चौथा चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए परिवार के मुखिया की दिव्यांगता 50 प्रतिशत होना अनिवार्य

Feb 8, 2026 - 15:59
Feb 8, 2026 - 16:41
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ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश में बीपीएल परिवारों की पहचान के लिए सर्वेक्षण के चौथा चरण की प्रक्रिया शुरू  

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला   08-02-2026

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश में बीपीएल परिवारों की पहचान के लिए सर्वेक्षण के चौथा चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए परिवार के मुखिया की दिव्यांगता 50 प्रतिशत होना अनिवार्य थी, लेकिन अब नए नियमों के तहत अब इसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। 

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव सीपाल रासू की ओर से नए नियम अधिसूचित किए गए। पहले बीपीएल में शामिल होने के लिए मनरेगा में 100 दिन का काम होना अनिवार्य था, इसे घटाकर 80 दिन कर दिया गया है। पहली बार एक विशेष श्रेणी को जोड़ा गया है। 

प्रदेश सरकार ने बीपीएल परिवारों के चयन के लिए पात्रता मानदंडों में छूट दी है। सरकार के इस कदम से अब हजारों नए परिवारों के लिए बीपीएल सूची में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने मुख्य रूप से दो पुरानी शर्तों में बदलाव किया है और एक नई मानवीय शर्त जोड़ी हैं।

इसके मुताबिक यदि परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य किसी दुर्घटना के कारण रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से स्थायी रूप से बिस्तर पर या अशक्त हो गया है, तो उस परिवार को सीधे पात्रता दी जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन परिवारों ने पहले आवेदन किया था और किन्हीं कारणों से वे अपात्र हो गए थे। 

उनके आवेदनों की भी नए नियमों के आधार पर दोबारा समीक्षा की जाएगी। ऐसे पात्र परिवार, जिन्होंने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे 17 फरवरी तक संबंधित खंड विकास अधिकारी कार्यालय में आवेदन जमा करवा सकते हैं। सर्वेक्षण के पहले तीन चरणों में प्रदेश भर में कुल 59829 परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल किया गया है।

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