नशामुक्त अभियान में समुदाय का लें सक्रिय सहयोग, दुष्प्रभावों के प्रति करें जागरूक- अपूर्व देवगन

नशामुक्त भारत अभियान के तहत बुधवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सौजन्य से आज यहां ‘ड्रग डिमांड रिडक्शन, प्रिवेंशन एंड कम्युनिटी एक्शन’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त अपूर्व देवगन ने किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य नशे की मांग में कमी लाने, नशे की रोकथाम तथा नशामुक्त समाज के निर्माण में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना तथा विभिन्न विभागों एवं हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

Sep 16, 2026 - 17:10
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नशामुक्त अभियान में समुदाय का लें सक्रिय सहयोग, दुष्प्रभावों के प्रति करें जागरूक- अपूर्व देवगन
यंगवार्ता न्यूज - मंडी, 16 सितंबर :
 नशामुक्त भारत अभियान के तहत बुधवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सौजन्य से आज यहां ‘ड्रग डिमांड रिडक्शन, प्रिवेंशन एंड कम्युनिटी एक्शन’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त अपूर्व देवगन ने किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य नशे की मांग में कमी लाने, नशे की रोकथाम तथा नशामुक्त समाज के निर्माण में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना तथा विभिन्न विभागों एवं हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। अभियान के अंतर्गत युवाओं, विद्यार्थियों तथा आमजन को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ नशीले पदार्थों की रोकथाम और समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल दिया जा रहा है।
अपूर्व देवगन ने कहा कि नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियान, शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां, युवाओं की भागीदारी, सामुदायिक कार्यक्रम तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास लगातार जारी हैं। साथ ही नशे की समस्या से प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यक सहायता एवं उचित मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
उपायुक्त ने कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासन, पुलिस, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संगठनों, पंचायतों, अभिभावकों और समुदाय की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेल, शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक अवसरों को बढ़ावा देने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध अभियान को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें तथा समुदाय को इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ें। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने और अपने साथियों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
कार्यशाला के समापन अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त प्रियांशु खाती ने नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नशे की रोकथाम केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, सामाजिक संगठनों और समुदाय को मिलकर इस दिशा में कार्य करना होगा। इस अवसर पर जिला कल्याण अधिकारी समीर ने जिले में नशामुक्त भारत अभियान के तहत चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
इससे पहले कार्यशाला में प्रो. वीना राठौर ने “व्यक्तियों, परिवारों एवं समुदायों पर नशे का प्रभाव” विषय पर प्रस्तुति दी। डॉ. पवनेश महंत ने विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों के प्रमुख लक्षणों तथा नशे के व्यक्ति एवं उसके परिवार के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने समय रहते लक्षणों की पहचान करने, उचित चिकित्सा एवं परामर्श लेने तथा नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
ब्रह्माकुमारी संगठन से निशान ने सकारात्मक सोच, आत्म-नियंत्रण, तनाव प्रबंधन तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर चर्चा की और ध्यान एवं आत्मचिंतन के माध्यम से मानसिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया। 
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु वर्मा ने एनडीपीएस कानून की रूपरेखा, जोखिम एवं सुरक्षा कारक, संवेदनशील समूहों, नशीले पदार्थों की आपूर्ति में कमी लाने के उपायों तथा नशे की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने की रणनीतियों पर जानकारी दी।  गुंजन संस्था के प्रतिनिधि पंकज पंडित ने सामुदाय आधारित हस्तक्षेप विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने नशे की रोकथाम में समुदाय की भूमिका, युवाओं की भागीदारी तथा स्थानीय स्तर पर जागरूकता एवं सहयोगात्मक गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संस्थाओं तथा अन्य संबंधित हितधारकों ने भाग लिया। इस दौरान नशे की रोकथाम, जागरूकता, उपचार, पुनर्वास तथा सामुदायिक सहभागिता, नशे के दुष्प्रभावों, रोकथाम, उपचार तथा नशे की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने के उपायों पर विचार-विमर्श भी किया गया। 

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