उन्नत कृषि विधियां आत्मनिर्भर भारत का बनेंगी आधार 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् , नई दिल्ली के तत्वाधान में अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर में कृषक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया

Mar 18, 2026 - 15:07
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उन्नत कृषि विधियां आत्मनिर्भर भारत का बनेंगी आधार 
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यंगवार्ता न्यूज़ - धौलाकुआं    18-03-2026

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् , नई दिल्ली के तत्वाधान में अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर में कृषक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें अनुसूचित जाति  से संबंधित 400 किसान महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया जिन्हें रोजमर्रा के कृषि कार्यों में उपयोगी उन्नत उपकरण भी उपलब्ध करवाए गए। 

कार्यक्रम में जिला सिरमौर के कृषि उप-निदेशक एवं परियोजना निदेशक (आत्मा) डॉ. साहब सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे और प्रतिभागियों से कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में परिचर्चा की। इस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन देश के अग्रणी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने कृषि विज्ञान केंद्र, सिरमौर के सहयोग से किया।

संस्थान के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों डॉ. सीता राम बिश्नोई और डॉ. गिरिजेश ने अपने संबोधन में बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के हर-पल हर-डगर किसानों का हमसफर  के उद्देश्य के साथ किया गया है ताकि भारत सरकार की परियोजनाओं की जानकारी और लाभ अनुसूचित वर्ग के किसानों तक पहुंच सके और उन्हें उन्नत कृषि विधियों की जानकारी देने के साथ उनके द्वारा किए जा रहे कृषि कार्यों में नवीनता लाई जा सके। 

इस अवसर पर कृषि विभाग की मृदा संरक्षण अधिकारी डॉ. नेहा शर्मा ने मिट्टी की सेहत और उसके सुधार और कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. शिवाली धीमान ने फसलों को रोगों से बचाव हेतू अपनाई जाने वाली उन्नत कृषि विधियों के बारे में प्रतिभागियों के साथ चर्चा की।

कृषि विज्ञान केंद्र, सिरमौर के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के द्वारा इस कार्यक्रम के लिए जिला सिरमौर को प्राथमिकता देने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निरंतर हों रहे जलवायु परिवर्तन और मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र की मुख्य चुनौती खाद्य एवं पोषण सुरक्षा है। 

जिसके लिए भारत के साथ-साथ  विश्व के अन्य देशों के कृषि वैज्ञानिक भी कृषि तकनीकों के नवाचार और उनके प्रचार-प्रसार के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन यह किसानों की सहभागिता और उनके परंपरागत कृषि ज्ञान और विधियों में नवीनता लाए  बिना संभव नहीं है। डॉ. मित्तल ने अपने संबोधन में कृषि विश्वविद्यालय के धौलाकुआं परिसर में कृषि क्षेत्र में हो रहे महत्वपूर्ण नवाचारों और विधियों के संदर्भ में उपस्थित किसानों को अवगत करवाया। 

इनका अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि मौसम में आकस्मिक बदलाव की चुनौती का सामना करने के लिए फसलों की ऐसी किस्मों को लगाएं जो जलवायु प्रतिरोधी हों। उन्होंने बताया कि ऐसी उन्नत किस्मों का बीज उत्पादन धौलाकुआं केंद्र पर किया जा रहा है ताकि कृषि विभाग के माध्यम से सिरमौर के किसानों को भी इन जलवायु प्रतिरोधी और पोषण में उत्तम किस्मों का बीज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध करवाया जा सके।

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