चंद घंटों में हो सकेगी खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान, एम्स बिलासपुर में जल्द स्थापित होगी मशीन
एम्स बिलासपुर में अब चंद घंटों में खतरनाक बैक्टीरियां की पहचान हो सकेगी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जल्द ही आधुनिक मशीन वाइटेक 2 कांपेक्ट स्थापित होने जा रही है। मशीन लगने से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान अब दिनों के बजाय महज कुछ ही घंटों में हो जाएगी। इससे मरीज का इलाज तुरंत शुरू किया जा सकेगा।
बिलासपुर 01 जून, 2026 :
एम्स बिलासपुर में अब चंद घंटों में खतरनाक बैक्टीरियां की पहचान हो सकेगी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जल्द ही आधुनिक मशीन वाइटेक 2 कांपेक्ट स्थापित होने जा रही है। मशीन लगने से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान अब दिनों के बजाय महज कुछ ही घंटों में हो जाएगी। इससे मरीज का इलाज तुरंत शुरू किया जा सकेगा।
इस मशीन के दो मुख्य काम होंगे। पहला मरीज के शरीर में खून, यूरीन या पस के सैंपल में मौजूद बीमारी फैलाने वाले फंगस की पहचान करना। दूसरा यह जांचना कि उस बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने के लिए कौन सी एंटीबायोटिक दवा सबसे ज्यादा असरदार रहेगी और कौन बेअसर। मेडिकल भाषा में इसे ऑटोमेटेड बैक्टीरियल आईडी (आइडेंटिफिकेशन) एंड एएसटी (एंटीबायोटिक ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग) कहा जाता है, कंप्यूटर और रोबोटिक तकनीक पर काम करती है।
जब किसी मरीज के शरीर में इंफेक्शन होता है, तो बैक्टीरिया की पहचान करने और सही दवा का पता लगाने के लिए कल्चर टेस्ट में कम से कम 48 से 72 घंटे का समय लग जाता है। तब तक डॉक्टर अंदाजे से दवाई देना शुरू कर देते हैं, लेकिन वाइटेक 2 कांपेक्ट के आने से संक्रमण फैलाने वाले सटीक बैक्टीरिया की पहचान कुछ ही घंटों में हो जाएगी।
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