कविंद्र गुप्ता ने हिमाचल के 30वें राज्यपाल के रूप में पद व गोपनीयता की ली शपथ
हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने लोकभवन शिमला में पद व गोपनीयता की शपथ ली। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया ने उनको शपथ दिलाई
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 10-03-2026
हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने लोकभवन शिमला में पद व गोपनीयता की शपथ ली। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया ने उनको शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, मंत्रिमंडल के कई मंत्री, मुख्य सचिव, कई अधिकारी व अन्य लोग उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने हिंदी में शपथ ग्रहण की। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने राष्ट्रपति का वारंट पढ़ा, राष्ट्रपति नियुक्ति के लिए इसे जारी करते हैं। राजयपाल के शपथ समारोह कार्यक्रम में पहली बार छ छंदों वाला वंदे मातरम गाया गया। बता दें कि नए निर्देश के तहत अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य किया गया है।
सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा, जैसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समय होता है। हिमाचल में राजयपाल की शपथ समारोह से यह परंपरा शुरू हुई। मीडिया से बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वंदे मातरम के सभी 6 छंद शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई जाने के निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुझे भी केवल एक ही छंद आता था। हमें मुगलों और अंग्रेजों की गुलामी की ही शिक्षा दी गई।
इस प्रचलन को अब बदलना होगा। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के हितों के लिए वह केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल के हितों की पैरवी करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कई मंत्रियों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने के मामले पर भी केंद्र सरकार से बात की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार और विपक्ष का भी सहयोग लिया जाएगा। युवा कल्याण, जनजातीय विकास, कौशल विकास आधारित शिक्षा और नशा मुक्ति को राज्यपाल ने अपनी प्राथमिकता बताया।
हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल कविंद्र गुप्ता का जन्म 2 दिसंबर 1959 को जम्मू में हुआ है। वह सार्वजनिक जीवन और प्रशासन में चार दशकों से अधिक के अनुभव के साथ एक कुशल जननेता एवं प्रशासक हैं। उनके पिता केंद्र सरकार के डाक विभाग में कार्यरत थे।
1963 में परिवार पंजाब के संगरूर में स्थानांतरित हो गया, यहां कविंद्र गुप्ता की प्रारंभिक शिक्षा हुई। इसके बाद उन्होंने फिरोजपुर और गुरदासपुर में अध्ययन किया।
1979 में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज गुरदासपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1970 के दशक के प्रारंभ में कविंद्र गुप्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े, जो उनके सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन का आरंभ था। आपातकाल (1975-1977) के दौरान उन्हें आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं के साथ गुरदासपुर और पटियाला जेल में कारावास जाना पड़ा।
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