हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने लॉन्च किया भारत का भविष्य नामक अभियान
नशा मुक्ति अभियान को जन आन्दोलन बनाने के उददेश्य से हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने भारत का भविष्य’ नामक अभियान को समूचे प्रदेश में आरंभ कर दिया है जिसकी शुरूआत बीते रोज मंडी जिला से की गई है । समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुण्डीर ने बताया कि ‘भारत का भविष्य’ अभियान सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता, जलवायु परिवर्तन, आजीविका, महिला सुरक्षा, सार्वजनिक शिक्षा एवं जन स्वास्थ्य आदि मुद्दों को लेकर होगा।
शिमला 04 मई , 2026 :
नशा मुक्ति अभियान को जन आन्दोलन बनाने के उददेश्य से हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने भारत का भविष्य’ नामक अभियान को समूचे प्रदेश में आरंभ कर दिया है जिसकी शुरूआत बीते रोज मंडी जिला से की गई है । समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुण्डीर ने बताया कि ‘भारत का भविष्य’ अभियान सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता, जलवायु परिवर्तन, आजीविका, महिला सुरक्षा, सार्वजनिक शिक्षा एवं जन स्वास्थ्य आदि मुद्दों को लेकर होगा।
उन्होने बताया कि इस अभियान को सुचारू रूप से कार्यान्वित करने के लिए संयुक्त मंच का गठन किया गया है जिसमें एआईपीएनएस और बीजीवीएस कार्यकारिणी के सदस्य हरियाणा से सोहन दास, हिमाचल से जोगिंन्द्र वालिया, समता की राष्ट्रीय संयोजिका सुमित्रा चंदेल, राज्य वित्त सचिव भीम सिंह, जन स्वास्थ्य के संस्थापक एन. आर. ठाकुर अध्यक्ष डॉ विजय विशाल, समता राज्य संयोजिका सुनीता बिष्ट, सांस्कृतिक उपसमिति के प्रभारी गजेंद्र शर्मा आदि को शामिल किया गया है ।
सत्यवान पुंडीर ने बताया कि इन परिस्थितियों के मद्देनजर जन विज्ञान आन्दोलन एक वैकल्पिक सोच और विचार की आवश्यकता करता है और आम जनता के बीच वैज्ञानिक, तर्कसंगत समझ के साथ, संस्कृति शिक्षा स्वास्थ्य, रोजगार अजीविका और वैज्ञानिक चेतना जैसे विषयों को लेकर जन अभियान चलाएगा।
हरियाणा इकाई के उपाध्यक्ष सोहन दास ने कहा कि जन विज्ञान आन्दोलन वैज्ञनिक चेतना, समानता, समाजिक न्याय, बहुलतावाद एवं जन केन्द्रित विकास का हिमायती है जबकि वर्तमान में सारा जोर कारपोरेट केन्द्रित विकास, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तथा सार्वजनिक सेवाओं को खत्म करने और शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सेवाओं के व्यवसायीकरण पर दिया जा रहा है।
समता उपसमिति की राष्ट्रीय संयोजिका सुमित्रा चंदेल ने बताया कि सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य के निजीकरण, बढ़ती बेरोजगारी, कृषि और आजिविका का संकट, घटती खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण का क्षय, जलवायु परिवर्तन, और प्रदूषण का असर गरीबों की जिदगी पर सीधा पड़ रहा है।
जोगिंन्द्र वालिया ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय विदेशी प्रौद्योगिकी एवं उसके आयात पर निर्भरता बढ़ी है। अंधविशवास व छद्म विज्ञान को बढ़ावा दिया जा रहा है और वैज्ञानिक चेतना पर प्रहार किया जा रहा है।
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