कांग्रेस सरकार सेब बागवानों पर थोप रही मनमानी, 100 पेटी की सीमा से होगा भारी नुकसान — संदीपनी भारद्वाज

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार द्वारा एमआईएस के तहत एक बागवान से केवल 100 पेटी सेब खरीदने के प्रस्तावित निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला बागवान हितों के खिलाफ है और इससे प्रदेश के हजारों सेब उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

Jun 18, 2026 - 18:38
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कांग्रेस सरकार सेब बागवानों पर थोप रही मनमानी, 100 पेटी की सीमा से होगा भारी नुकसान — संदीपनी भारद्वाज

यंगवार्ता न्यूज शिमला 18 जून, 2026 : 


 भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार द्वारा एमआईएस के तहत एक बागवान से केवल 100 पेटी सेब खरीदने के प्रस्तावित निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला बागवान हितों के खिलाफ है और इससे प्रदेश के हजारों सेब उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लगातार बागवानों की समस्याओं को समझने में विफल रही है। अब एमआईएस के तहत 100 पेटी की सीमा तय कर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उसे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले बागवानों की कोई चिंता नहीं है। सरकार को यह बताना चाहिए कि जिन बागवानों का उत्पादन 100 पेटी से अधिक है, उनके शेष उत्पाद का क्या होगा और उन्हें उचित मूल्य कैसे मिलेगा।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार बिना व्यापक विचार-विमर्श और बागवान संगठनों को विश्वास में लिए एकतरफा फैसले ले रही है। पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे बागवानों पर यह नया निर्णय अतिरिक्त बोझ डालने वाला है। सरकार को बागवानों के हितों की रक्षा करने के बजाय उनकी आय सीमित करने की चिंता दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की गई थीं, जबकि वर्तमान सरकार लगातार ऐसे निर्णय ले रही है जिनसे बागवानों में असंतोष बढ़ रहा है। यदि सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है तो इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक सुधार किए जाएं, न कि खरीद की सीमा निर्धारित कर बागवानों के अधिकारों को सीमित किया जाए।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कांग्रेस सरकार से मांग की कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए तथा बागवान संगठनों, विशेषज्ञों और हितधारकों से चर्चा कर ऐसी नीति बनाई जाए जो प्रदेश के सभी बागवानों के हितों की रक्षा कर सके।

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