जल शक्ति विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में पेश की गई रिपोर्ट ने विभाग में बड़े गड़बड़झाले को किया उजागर

हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में पेश की गई रिपोर्ट ने विभाग में बड़े गड़बड़झाले को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2025 के दौरान 4,500 मीट्रिक टन से अधिक जीआई पाइप की आपूर्ति में नियमों की गंभीर अनदेखी

Jan 12, 2026 - 11:08
Jan 12, 2026 - 11:14
 0  48
जल शक्ति विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में पेश की गई रिपोर्ट ने विभाग में बड़े गड़बड़झाले को किया उजागर
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    12-01-2026

हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में पेश की गई रिपोर्ट ने विभाग में बड़े गड़बड़झाले को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2025 के दौरान 4,500 मीट्रिक टन से अधिक जीआई पाइप की आपूर्ति में नियमों की गंभीर अनदेखी की गई। 

दस्तावेजों में आशंका जताई गई है कि आपूर्तिकर्ता कंपनी ने वास्तविक ट्रांसशिपमेंट के बिना फर्जी ई-वे बिल पेश किए। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के मिनट्स में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। 22 पृष्ठों की रिपोर्ट में दर्ज है कि वर्ष 2024-25 के दौरान एल-1 फर्म होने के नाते मैसर्स एपीएल अपोलो ट्यूब्स लिमिटेड को 4,770 मीट्रिक टन जीआई पाइप की आपूर्ति का आदेश दिया गया, जिसकी लागत 36.77 करोड़ थी। 

इसमें से 13.150 मीट्रिक टन (80 एमएम पीई) जीआई पाइप, जिसकी कीमत 10.19 लाख बताई, जो बिना सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि को सूचना दिए बड़सर डिवीजन को भेज दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने दावा किया कि एक ट्रक (एचआर 39एफ7899) में आनी व बड़सर के लिए सामग्री भेजी गई। आनी डिवीजन के लिए 12.550 और बड़सर के लिए 13.150 मीट्रिक टन सामग्री दिखाई गई। बाद में सफाई दी कि पहाड़ी क्षेत्र में ट्रक लोड नहीं उठा सका, जिसके चलते बड़सर की सामग्री दूसरे ट्रक (एचपी-72बी 0655) में भेजी गई। 

हालांकि इस पूरे ट्रांसशिपमेंट प्रक्रिया में न तो सिविल सप्लाई के प्रतिनिधि की मौजूदगी दर्ज है और न वीडियोग्राफी के प्रमाण हैं। रिपोर्ट के अनुसार निविदा शर्तों में सामग्री की तौल, डिस्पैच और ट्रांसशिपमेंट सिविल सप्लाई के प्रतिनिधि की मौजूदगी में होना जरूरी था, जिसका पालन नहीं हुआ। स्क्रीनिंग कमेटी के सामने रखे गए ये आंकड़े विभागीय लापरवाही ही नहीं, बल्कि संभावित मिलीभगत और दस्तावेजों की हेराफेरी की ओर भी इशारा कर रहे हैं। 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow