मांगे पूरी न हुई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे एंबुलेंस कर्मचारी , 5 दिन की सामूहिक हड़ताल पर बैठे एंबुलेंस कर्मी

हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी की सामूहिक हड़ताल जारी है। पांच दिनों की इस हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस बीच सरकार और कंपनी प्रबंधन की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलता है तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। जिला मुख्यालय नाहन में डीसी  कार्यालय के बाहर 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी सीटू के बैनर तले हड़ताल पर बैठे हुए है

Feb 13, 2026 - 18:56
Feb 13, 2026 - 19:57
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मांगे पूरी न हुई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे एंबुलेंस कर्मचारी , 5 दिन की सामूहिक हड़ताल पर बैठे एंबुलेंस कर्मी
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  13-02-2026
हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी की सामूहिक हड़ताल जारी है। पांच दिनों की इस हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस बीच सरकार और कंपनी प्रबंधन की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलता है तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। जिला मुख्यालय नाहन में डीसी  कार्यालय के बाहर 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी सीटू के बैनर तले हड़ताल पर बैठे हुए है। वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील दत्त ने कहा कि अपनी जायज मांगों के लिए 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों को बार-बार हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। 
मगर मांगों को लेकर ना तो सरकार और ना ही कंपनी प्रबंधन गंभीर है जिससे कर्मचारियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों द्वारा कोर्ट के आदेश अनुसार निर्धारित वेतन देने की मांग की जा रही है , लेकिन न्यायालय के आदेशों के बावजूद कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है और कर्मचारियों का सीधे तौर पर शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल पर जाने के बाद कंपनी प्रबंधन ने ऐसे कर्मचारियों को 102 और 108 एंबुलेंस में बैठा दिया है जिनके पास किसी तरह का कोई अनुभव नहीं है ऐसे में लोगों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। 
वर्कर्स यूनियन के जिला अध्यक्ष सुरजीत ने कहा कि  मुख्य रूप से कर्मचारियों द्वारा मांग की जा रही है कि उच्च न्यायालय और लेबर कोर्ट द्वारा निर्धारित ₹20000 का वेतन सभी कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए जो नहीं दिया जा रहा है उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा मात्र 11700 रुपए का वेतन कर्मचारियों को दिया जाता है और यदि कोई कर्मचारी अवकाश पर जाना चाहता है तो अवकाश न देकर उस कर्मचारी का वेतन काटा जाता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश अनुसार कंपनी को 8 घंटे काम करवाने की एवज में 20 हजार का वेतन देना चाहिए जबकि 12 घंटे का काम करवाने के बावजूद मात्र 11700 का वेतन दिया जा रहा है जो न्याय संगत नहीं है।
 

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