देशभर से एकत्रित राजमाश की 4,000 उन्नत किस्मों का किया जा रहा मूल्यांकन , केवीके  कुकुमसेरी में खेत दिवस आयोजित

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी लाहौल-स्पीति द्वारा जनजातीय उप-योजना के अंतर्गत आज 05 सितंबर, 2026 को राजमाश पर खेत दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के लगभग 100 प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुभाष कुमार, कार्यक्रम समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी द्वारा मुख्य अतिथि डॉ. विनोद शर्मा, निदेशक अनुसंधान, चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर तथा अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. पद्मावती गणपत गोरे , वरिष्ठ वैज्ञानिक, एनबीपीजीआर-आईसीएआर, नई दिल्ली विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं

Sep 5, 2026 - 19:23
Sep 5, 2026 - 19:54
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देशभर से एकत्रित राजमाश की 4,000 उन्नत किस्मों का किया जा रहा मूल्यांकन , केवीके  कुकुमसेरी में खेत दिवस आयोजित

यंगवार्ता न्यूज़ - कांगड़ा  05-08-2026
चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी लाहौल-स्पीति द्वारा जनजातीय उप-योजना के अंतर्गत आज 05 सितंबर, 2026 को राजमाश पर खेत दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के लगभग 100 प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुभाष कुमार, कार्यक्रम समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी द्वारा मुख्य अतिथि डॉ. विनोद शर्मा, निदेशक अनुसंधान, चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर तथा अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. पद्मावती गणपत गोरे , वरिष्ठ वैज्ञानिक, एनबीपीजीआर-आईसीएआर, नई दिल्ली विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। 
किसानों को संबोधित करते हुए परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. राकेश छाहोटा ने बताया कि देशभर से एकत्रित की गई राजमाश की लगभग 4,000 उन्नत फसल पंक्तियों/किस्मों का वर्तमान में अनुसंधान केंद्र में मूल्यांकन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गहन परीक्षण एवं मूल्यांकन के उपरांत जो किस्में बेहतर प्रदर्शन करने वाली एवं उच्च गुणवत्ता वाली पाई जाएंगी, उन्हें भविष्य में स्थानीय किसानों को खेती के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। डॉ. पद्मावती गोरे ने राजमाश के बीज संरक्षण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की तथा किसानों को पारंपरिक किस्मों को संरक्षित करने और उनके विस्तृत मूल्यांकन के लिए केंद्र पर उपलब्ध करवाने पर जोर दिया। वैज्ञानिकों डॉ. जोगिंदर पाल , डॉ. शैलजा शर्मा , डॉ. नेहा शर्मा एवं डॉ. आशिता बिष्ट ने भी अपने-अपने विशेषज्ञता क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी किसानों के साथ साझा की। 
डॉ. प्रदीप कुमार ने राजमाश की उचित पैकेजिंग एवं विपणन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेहतर पैकेजिंग और विपणन के माध्यम से किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने लाहौल घाटी में फसल विविधीकरण के संबंध में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की। डॉ. सुभाष कुमार, कार्यक्रम समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी ने केंद्र में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी किसानों के साथ साझा की तथा उनके साथ संवाद किया। समापन अवसर पर डॉ. विनोद कुमार शर्मा, निदेशक अनुसंधान ने किसानों की आय बढ़ाने में राजमाश की खेती के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में राजमाश की खेती को बढ़ावा देना किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नेहा शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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