यंगवार्ता न्यूज़ - मंडी 18-01-2026
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि यह सरकार पूरी तरह से 'मित्रों की सरकार' बनकर रह गई है, जिसे प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य की कोई रत्ती भर भी चिंता नहीं है। मंडी से जारी प्रेस बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने प्रदेश के युवाओं को हर साल एक लाख सरकारी नौकरियां देने का लुभावना चुनावी वादा किया था, लेकिन आज कार्यकाल के चौथे वर्ष में भी स्थिति इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। आज प्रदेश का पढ़ा-लिखा युवा सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर है और मुख्यमंत्री अपनी तमाम मेहरबानियां केवल अपने सेवानिवृत्त मित्रों और चहेतों पर बरसा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सुक्खू सरकार में योग्यता और वरिष्ठता को दरकिनार कर केवल चाटुकारिता को पुरस्कृत किया जा रहा है।
इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण यह है कि मुख्यमंत्री ने अपने एक तहसीलदार मित्र को तमाम प्रशासनिक मर्यादाओं और नियमों को ताक पर रखकर एचएएस अधिकारी बना दिया , जबकि इस विवादास्पद पदोन्नति के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका अभी भी लंबित है। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद अपने मित्र को उपकृत करना न केवल उन अधिकारियों के साथ अन्याय है जो ईमानदारी से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, बल्कि यह न्यायपालिका की गरिमा का भी अपमान है। नेता प्रतिपक्ष ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों के कार्यकाल में इस सरकार ने एक भी बेरोजगार युवा को राजस्व विभाग में स्थायी रोजगार का अवसर प्रदान नहीं किया। सरकार की नियत का खोट इस बात से पूरी तरह स्पष्ट होता है कि कार्यकाल के चौथे वर्ष में प्रवेश करते ही 530 पटवारी पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया। इस विज्ञापन के माध्यम से प्रदेश के लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के अभ्यर्थियों से परीक्षा शुल्क के नाम पर 12 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि वसूली गई। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब सरकार का इरादा युवाओं को पारदर्शी तरीके से नौकरी देने का था ही नहीं , तो बेरोजगारों की जेब पर यह डाका क्यों डाला गया?
सबसे अधिक पीड़ादायक और शर्मनाक पहलू यह है कि अभी इन पदों के लिए लिखित परीक्षा तक आयोजित नहीं की गई है , लेकिन सरकार ने चोर दरवाजे से अपने चहेते सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इन्हीं पदों पर पुनर्नियुक्ति देने का सिलसिला तेज कर दिया है। यह प्रदेश के उन 1 लाख 87 हजार परिवारों के बेरोजगार युवाओं के साथ एक भद्दा और क्रूर मजाक है जो दिन-रात सरकारी लाइब्रेरी और कमरों में बैठकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कड़े शब्दों में कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री सरकारी खजाना खाली होने का रोना रोते हुए जनता पर टैक्स का बोझ डाल रहे हैं और दूसरी तरफ अपने चहेतों को सेवानिवृत्ति के बाद भी मोटी पगार , आलीशान दफ्तर और भत्तों के साथ फिर से नौकरी पर रखकर प्रदेश के सीमित संसाधनों की लूट मचा रहे हैं। यदि सरकार को केवल अपने ही खास लोगों और रिटायर्ड मित्रों को मलाई बांटनी है , तो फिर परीक्षाओं का यह ढोंग क्यों रचा जा रहा है? प्रदेश के युवाओं से करोड़ों रुपये की फीस वसूली किसी बड़े वित्तीय घोटाले से कम नहीं है।
हिमाचल का युवा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है , क्योंकि उसे उम्मीद थी कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर आई सरकार भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाएगी , लेकिन यहां तो चयन आयोगों को बंद कर और परिणामों को अनिश्चितकाल के लिए लटका कर युवाओं के सुनहरे भविष्य को अंधकार में धकेल दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार यह न भूलें कि वह युवाओं के बड़े वादों के दम पर ही सत्ता की कुर्सी तक पहुँची थी और आज वही युवा खुद को उपेक्षित और अपमानित पाकर आक्रोशित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पुरजोर मांग की कि वे तुरंत प्रभाव से सेवानिवृत्त लोगों को दी जा रही असंवैधानिक पुनर्नियुक्ति पर रोक लगाएं और पटवारी भर्ती सहित अन्य लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ अविलंब संपन्न कराएं, ताकि प्रदेश के काबिल युवाओं को उनका हक मिल सके। यदि सरकार ने अपनी इस जनविरोधी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के बेरोजगारों के हक की इस लड़ाई को सड़कों से लेकर सदन तक और भी उग्र रूप से लड़ेगी।