यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 27-03-2025
हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई का एलान कर दिया है। बुधवार को सदन में उप मुख्यमंत्री की ओर से रविवार को बसें न चलाने पर परमिट रद्द करने की चेतावनी से निजी बस ऑपरेटर भड़क गए हैं। बस ऑपरेटरों ने वर्चुअल बैठक कर बसें खड़ी कर हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने निजी बस ऑपरेटरों को वर्किंग कैपिटल में सब्सिडी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई राहत नहीं दी गई। अब वह धमकाने पर उतर आई है।
सरकार ने निजी बस ऑपरेटरों को एचआरटीसी के रूट परमिट देने का ऐलान किया था, लेकिन एचआरटीसी नियमों के विपरीत रूट परमिट सरेंडर कर रहा है। इससे निजी ऑपरेटरों के साथ धोखा हुआ है। यूनियन के महासचिव रमेश कमल ने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए 3 साल हो रहे हैं लेकिन प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर को अभी तक कोई भी सुविधा प्रदान नहीं की है। सरकार ने पहले 3 रुपये प्रति लीटर डीजल के रेट में इजाफा कर दिया। प्रदेश में आपदा आई तो सरकार ने 3 रुपये प्रति लीटर डीजल का मूल्य बढ़ाया। अब सरकार निजी बस ऑपरेटरों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
उन्होंने कहा कि एचआरटीसी बसों में महिलाओं को किराये में 50 फीसदी छूट दी जा रही है, उससे निजी ऑपरेटरों को नुकसान हो रहा है। पूर्व भाजपा सरकार ने कोविड के दौरान निजी बस ऑपरेटरों को बसें चलाने के लिए प्रति बस 2 लाख रुपये वर्किंग कैपिटल के रूप में बैंक से लोन दिलवाया था, जिसके एवज में प्रदेश सरकार द्वारा बैंक के ब्याज में सब्सिडी के तौर पर राहत देनी थी। लेकिन मौजूदा सरकार ने उस पर अभी तक कोई भी निर्णय नहीं लिया। दूसरी ओर एआरएचटीसी ने 2008 के बाद एसआरटी जमा नहीं कराया और उसके परमिट रिन्यू किए जा रहे हैं, नए परमिट भी दिए जा रहे हैं।
रमेश कमल ने कहा है कि यूनियन कई बार सरकार से न्यूनतम किराए में कम से कम 15 रुपये बढ़ोतरी की मांग कर चुकी है। यह हिमाचल में देश में सबसे कम है। निजी बस ऑपरेटर द्वारा अगर एसआरटी जमा करने में थोड़ा विलंब हो जाए तो परिवहन विभाग बस जब्त कर लेता है जबकि एचआरटीसी पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। निजी ऑपरेटर को मोटर वाहन कराधान अधिनियम में 50 फीसदी टैक्स जमा करने का प्रावधान भी है, उसकी भी राहत नहीं दी जा रही।