एसएफआई द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आज समापन
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आज दूसरे दिन सफल एवं प्रभावशाली समापन हुआ। कार्यक्रम के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में एसएफआई के ऑल इंडिया प्रेसिडेंट कॉमरेड आदर्श एम. साजी उपस्थित रहे।
शिमला 05 - 05 - 2026 :
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आज दूसरे दिन सफल एवं प्रभावशाली समापन हुआ। कार्यक्रम के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में एसएफआई के ऑल इंडिया प्रेसिडेंट कॉमरेड आदर्श एम. साजी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में कॉमरेड सुभाष जाखड़ (ऑल इंडिया जॉइंट सेक्रेटरी, एसएफआई) तथा स्पेशल गेस्ट के रूप में कॉमरेड अनिल ठाकुर (हिमाचल प्रदेश स्टेट प्रेसिडेंट) और सनी सेक्टा हिमाचल प्रदेश के स्टेट सेक्रेटरी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का दूसरा दिन सांस्कृतिक विविधता, छात्र एकता और वैचारिक विमर्श का संगम रहा। विभिन्न संकायों और विभागों के छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए नृत्य, गीत, नुक्कड़ नाटक, कविता और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली तरीके से मंच पर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम ने यह दर्शाया कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी महत्वपूर्ण मंच है।
मुख्य अतिथि कॉमरेड आदर्श एम. साजी ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह नीति शिक्षा के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करती है और शिक्षा के क्षेत्र में केंद्रीकरण को बढ़ावा देती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहु-सांस्कृतिक और विविधतापूर्ण देश में एक समान शिक्षा प्रणाली थोपना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह राज्यों की स्वायत्तता और उनकी सांस्कृतिक पहचान पर भी सीधा हमला है।
उन्होंने केंद्र सरकार के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों को खोखला बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। कॉमरेड आदर्श एम. साजी ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद देशभर में लगभग एक लाख स्कूल बंद होने की बात सामने आई है, जिससे हजारों-लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने इसे शिक्षा के निजीकरण और व्यावसायीकरण की दिशा में एक चिंताजनक कदम बताया।
कॉमरेड साजी ने छात्रों से आह्वान किया कि वे शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए संगठित हों और ऐसी नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल एक सेवा नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जा सकता।
गेस्ट ऑफ ऑनर कॉमरेड सुभाष जाखड़ ने अपने संबोधन में देश के वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज देश में सांप्रदायिकता, जातिवाद और क्षेत्रीयता के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम एक सकारात्मक संदेश देता है, जो विविधता में एकता को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि एसएफआई द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश को जोड़ने और समाज में भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करने का एक प्रयास है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना चाहिए।
स्पेशल गेस्ट कॉमरेड अनिल ठाकुर ने छात्रों की सक्रिय भागीदारी और आयोजन की सफलता के लिए एसएफआई इकाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है।
कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में शिक्षा के निजीकरण, बेरोजगारी, सामाजिक असमानता और सांप्रदायिकता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। छात्रों ने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि वे केवल दर्शक नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव के सक्रिय भागीदार हैं। इस दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय परिसर में एक नई ऊर्जा और जागरूकता का संचार किया। कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि जब छात्र एकजुट होकर अपनी बात रखते हैं, तो वे न केवल अपनी समस्याओं को उजागर कर सकते हैं, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी दे सकते हैं।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और उपस्थित दर्शकों का धन्यवाद किया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प दोहराया। यह कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का मंच बना, बल्कि यह सामाजिक एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और शिक्षा के अधिकार के प्रति जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुआ।
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