कवालिया पीक पर भैंस पालकों का पारंपरिक जातर मेला संपन्न
जुन्गा तहसील की सुरम्य कवालिया चोटी पर भैंस पालकों द्वारा आयोजित पारंपरिक जातर मेला रविवार को कवालिया देवता की पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर ग्राम पंचायत पीरन और सतलाई के सैकड़ों लोगों ने कवालिया देवता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। देवता की पूजा के अवसर पर भैंस के दूध से विशेष खीर तैयार की जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित की जाती है ।
यंगवार्ता न्यूज - शिमला, 20 सितंबर :
जुन्गा तहसील की सुरम्य कवालिया चोटी पर भैंस पालकों द्वारा आयोजित पारंपरिक जातर मेला रविवार को कवालिया देवता की पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर ग्राम पंचायत पीरन और सतलाई के सैकड़ों लोगों ने कवालिया देवता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। देवता की पूजा के अवसर पर भैंस के दूध से विशेष खीर तैयार की जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित की जाती है ।
गौर रहे कि समुद्र तल से करीब आठ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित कवालिया मंदिर प्राचीन समय से ही क्षेत्र के भैंस पालकों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां प्रतिवर्ष भाद्रपद मास में शुभ मुहूर्त के अनुसार कवालिया देवता की जातर आयोजित की जाती है। देवता के पुजारी जबर सिंह ठाकुर ने बताया कि पीरन और सतलाई क्षेत्र के भैंस पालक वर्ष में करीब छह माह अपनी भैंसों के साथ कवालिया में अस्थायी शिविर लगाकर रहते हैं। दशहरे के बाद ठंड बढ़ने पर अपने घरों को लौट जाते हैं।
उन्होंने कहना है कि पीढ़ियों से भैंस पालक अपनी भैंसों को लेकर कवालिया पहुंचते रहे हैं। यहां पशु खुले वन क्षेत्र में विचरण करते हैं, जबकि पशुपालक अपने रहने के लिए घास-फूस से अस्थायी मकान तैयार करते हैं। कवालिया में भैंस पालकों द्वारा बनाए जाने वाले अस्थायी शैड में दरवाजा लगाना वर्जित माना जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि कवालिया देवता की कृपा से यहां चोरी अथवा अन्य अनहोनी का भय नहीं रहता।
ग्राम पंचायत पीरन के पूर्व प्रधान दयाराम वर्मा ने कहा कि कवालिया चोटी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यदि इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है।
उन्होंने बताया कि चायल और कुफरी आने वाले पर्यटक पजौली घाटी से करीब तीन किलोमीटर पैदल सफर कर कवालिया चोटी तक पहुंच सकते हैं। यहां पहुंचने पर पर्यटकों को हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों के साथ-साथ आसपास के मैदानी क्षेत्रों और प्राकृतिक वादियों का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ यह क्षेत्र धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति एवं ग्रामीण पर्यटन के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
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