चूड़धार में ईमानदारी की मिसाल: 5 लाख के गहनों और पैसों से भरा पर्स लौटाकर सिरमौरी पुजारी ने जीता श्रद्धालुओं का दिल
बाहरी हिमालय की सबसे ऊंची चोटी और समुद्र तल से 11,965 फीट की ऊंचाई पर स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र चूड़धार धाम से एक ऐसी प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने ईमानदारी और मानवता के प्रति लोगों के विश्वास को और मजबूत कर दिया है।
बाहरी हिमालय की सबसे ऊंची चोटी और समुद्र तल से 11,965 फीट की ऊंचाई पर स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र चूड़धार धाम से एक ऐसी प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने ईमानदारी और मानवता के प्रति लोगों के विश्वास को और मजबूत कर दिया है। चूड़धार मंदिर के सेवादार एवं शिरगुल महाराज के पुजारी पंडित दीप राम शर्मा ने लगभग पांच लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषणों और नकदी से भरा पर्स उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाकर न केवल एक परिवार की अमूल्य धरोहर लौटाई, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के बीच ईमानदारी की एक मिसाल भी कायम कर दी। आपको बताते चले कि पंडित दीप राम शर्मा को अधिकांश श्रद्धालु प्यार और इज्जत में "सिरमौरी पुजारी जी" के नाम से भी संबोधित करते है।
शनिवार को चूड़धार मंदिर की चोटी के समीप एक पर्स मिला। पर्स में सोने की अंगूठियां, मंगलसूत्र, पेंडेंट-लॉकेट सहित करीब पांच लाख रुपये मूल्य के आभूषण और 7,910 रुपये नकद रखे हुए थे। पर्स में कोई पहचान पत्र या ऐसा दस्तावेज नहीं था, जिससे उसके मालिक का पता लगाया जा सके। ऐसे में वास्तविक मालिक तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था।
पर्स मिलने की सूचना फैलते ही कुछ लोगों ने उस पर अपना दावा भी किया, लेकिन पंडित दीप राम शर्मा अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक कोई व्यक्ति पर्स में रखी गई प्रत्येक वस्तु और नकदी का सही विवरण नहीं देगा, तब तक पर्स किसी को नहीं सौंपा जाएगा। उनकी इस सतर्कता और दृढ़ता ने सुनिश्चित किया कि अमानत केवल उसके वास्तविक मालिक तक ही पहुंचे।
पंडित दीप राम शर्मा द्वारा यह जानकारी साझा किए जाने के बाद चूड़धार मंदिर समिति के कर्मचारी एवं प्रबंधक श्याम लाल शर्मा ने भी फेसबुक पर एक वीडियो जारी कर पर्स मिलने की सूचना सार्वजनिक की और संबंधित व्यक्ति से संपर्क करने की अपील की। सोशल मीडिया के माध्यम से किए गए इस प्रयास ने भी मालिक तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।
लगातार प्रयासों और जांच-पड़ताल के बाद सोमवार को उस महिला से संपर्क स्थापित हुआ, जिसने पर्स में रखे सभी आभूषणों और नकदी का सटीक विवरण दिया। इसके बाद पुष्टि हुई कि पर्स उत्तराखंड के विकासनगर निवासी रीना शर्मा का है। पर्स खोने के बाद वह गहरी निराशा के साथ चूड़धार से अपने घर लौट गई थीं और उन्हें लगने लगा था कि उनका कीमती सामान अब कभी वापस नहीं मिलेगा। परिवार की यादों और भावनाओं से जुड़े इन आभूषणों को खोने का दुख उन्हें भीतर तक परेशान कर रहा था।
जब उन्हें फोन पर बताया गया कि उनका पर्स और उसमें रखा पूरा सामान सुरक्षित है, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। भावुक होकर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी वापसी की कोई उम्मीद नहीं थी। इसके बाद उन्होंने अपने रिश्तेदार ऋतिक शर्मा को विशेष रूप से उत्तराखंड से चूड़धार भेजा ताकि वह सामान प्राप्त कर सके।
मंगलवार को चुड़ेश्वर सेवा समिति के सेवादारों सोहन, जिया लाल, रोशन शर्मा, प्रदीप तथा अन्य सदस्यों की मौजूदगी में उत्तराखंड के दशऊ गांव निवासी ऋतिक शर्मा को पर्स और उसमें रखा समस्त सामान विधिवत सौंप दिया गया। पर्स में रखा प्रत्येक आभूषण और पूरी नकदी सुरक्षित मिलने पर ऋतिक शर्मा ने चूड़धार मंदिर प्रबंधन, सेवा समिति और विशेष रूप से पंडित दीप राम शर्मा का आभार व्यक्त किया।
गौरतलब है कि पंडित दीप राम शर्मा मूल रूप से सिरमौर जिले की शिलाई तहसील में स्थित शुनकुटा ब्राह्मणों के सबसे बड़े गांव नाया के निवासी हैं तथा वर्तमान में उनका निवास रोनहाट में है। वह पिछले लगभग 25 वर्षों से चूड़धार मंदिर के सेवादार और शिरगुल महाराज के पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अपनी सादगी, समर्पण और धार्मिक सेवा भावना के लिए पहचाने जाने वाले पंडित दीप राम शर्मा ने इस घटना के माध्यम से यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होती, बल्कि ईमानदारी और मानवता की रक्षा करना भी उतना ही बड़ा धर्म है।
चूड़धार की पावन चोटी पर घटी यह घटना केवल खोए हुए पर्स के मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि विश्वास, जिम्मेदारी और ईमानदारी की ऐसी मिसाल है, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जिस धाम की सेवा ऐसे समर्पित और कर्तव्यनिष्ठ लोग कर रहे हों, वहां आस्था स्वतः और मजबूत हो जाती है। पंडित दीप राम शर्मा की यह ईमानदारी आज उस दौर में उम्मीद की एक मिसाल बनकर उभरी है, जब अक्सर लोग मानते हैं कि सच्चाई और नैतिकता पीछे छूटती जा रही हैं।
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