अंतर्देशीय रिश्तेदार और सौतेले माता पिता द्वारा दत्तक ग्रहण के लिए पंजीकरण अनिवार्य- उपायुक्त
अगर आप अपने परिवार या रिश्तेदारी में किसी बच्चे को गोद लेना चाहते है तो आपको अब केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के तहत पहले आवेदन करना होगा। इसके बाद सारी औपचारिकताएं करवाने के बाद जिला दंडाधिकारी द्वारा बच्चे का दत्तकग्रहण सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
यंगवार्ता न्यूज - शिमला 16 जुलाई, 2026 :
इसके अलावा प्रदेश सरकार के प्रयासों के कारण चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट को भावी माता पिता को दत्तक ग्रहण करने में सफलता हासिल हो रही है। 20 दिसंबर 2022 से लेकर एक सितंबर 2025 तक 25 चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट को भावी माता पिता को दत्तक ग्रहण करवाया जा चुका है।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने समाज के समृद्ध लोगों से अपील की कि वे शिशु गृह और आश्रमों में पल रहे किशोर बच्चों को अपनाने के लिए आगे आएं ताकि इन बच्चों का सुखद और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। अंतर्देशीय रिश्तेदार दत्तक ग्रहण और सौतेले माता पिता द्वारा दत्तक ग्रहण किया जा सकता है। इसके लिए उन्हें सीएआरए की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। इसके बाद सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही बच्चा सौंपा जाता है। उन्होंने कहा कि रिश्तेदारी और परिवार में बच्चों को ऐसे ही गोद ले लिया जाता है। इस वजह से कई बार कानूनी दिक्कतें पेश आती है। इस व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में परिवार एवं रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के माध्यम से कानूनी माता पिता का अधिकार मिलता है। ऐसे में लोगों को इन नियमों को सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि बच्चों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित हो सके।
जिला कार्यक्रम अधिकारी शिमला ममता पॉल ने जानकारी देते हुए कहा कि बच्चा गोद लेने के लिए जिन्होंने आवेदन किया होता है, उन्हें मेरिट के आधार पर माता पिता दत्तक ग्रहण करवाया जाता है। इसके लिए अधिनियम के मुताबिक जो नियम व शर्तें पूरी करते है उन्हें ही लाभ दिया जाता है।
देश के भीतर रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण
देश के भीतर रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण वह प्रक्रिया है जिसमें भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति अपने निकट संबंधी (जैसे भाई-बहन, चाचा-चाची, मामा-मामी, बुआ-फूफा, दादा-दादी या अन्य पात्र रिश्तेदार) के बच्चे को विधिक रूप से गोद लेता है। यह प्रक्रिया Central Adoption Resource Authority (CARA) द्वारा जारी दत्तक ग्रहण विनियमों तथा Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act के प्रावधानों के अनुसार संपन्न की जाती है।
रिश्तेदारी में दत्तक ग्रहण के लिए जैविक माता-पिता (या वैध अभिभावक) की सहमति, दत्तक ग्रहण करने वाले अभिभावकों की पात्रता तथा संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक होता है। इसके बाद सक्षम न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा दत्तक ग्रहण आदेश जारी किया जाता है। दत्तक ग्रहण पूर्ण होने के बाद बच्चे को दत्तक माता-पिता की संतान के समान सभी कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं, जिनमें पालन-पोषण, शिक्षा, उत्तराधिकार और अन्य वैधानिक अधिकार शामिल हैं। यदि बच्चा पांच वर्ष और उससे अधिक आयु का है तो उसमें बच्चे की सहमति भी ली जाएगी। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करते हुए उसे सुरक्षित, स्थायी और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
सोतेले माता-पिता द्वारा दत्तक ग्रहण
सौतेले माता-पिता द्वारा दत्तक ग्रहण (Step&Parent Adoption) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी बच्चे के जैविक माता या पिता के पुनर्विवाह के बाद उसका पति या पत्नी (सौतेले माता या पिता) उस बच्चे को कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण करता,करती है।
-दत्तक ग्रहण के लिए बच्चे के जैविक माता-पिता (जहां लागू हो) तथा सौतेले माता-पिता की सहमति आवश्यक होती है।
-यदि बच्चे का एक जैविक अभिभावक जीवित है और उसके अभिभावकीय अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, तो उसकी विधिसम्मत सहमति आवश्यक होती है।
-दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन तथा निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।
-सक्षम न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी द्वारा दत्तक ग्रहण आदेश जारी किए जाने के बाद बच्चा सौतेले माता-पिता की वैध संतान माना जाता है।
-दत्तक ग्रहण के पश्चात बच्चे को शिक्षा, पालन-पोषण, उत्तराधिकार तथा अन्य सभी वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाते हैं, जो एक जैविक संतान को प्राप्त होते हैं।
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जिला बाल संरक्षण अधिकारी इंदु शर्मा ने कहा कि भारत में भारतीय नागरिक, एनआरआई और विदेशी नागरिक हर कोई बच्चे को गोद ले सकता है। लेकिन उसके लिए सबसे पहले उन्हें केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा बनाए गए नियमों को पूरा करना जरूरी है।
शादी शुदा परिवार के अलावा इसके साथ ही सिंगल पैरेंट या कपल दोनों ही बच्चे को गोद ले सकते हैं। हालांकि मैरिड कपल के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं।
-अगर कोई शादीशुदा जोड़ा बच्चे को गोद ले रहा है तो उस कपल की शादी को कम से कम 2 साल का समय होना चाहिए।
-गोद लेने वाले बच्चे के माता-पिता को पहले से कोई जानलेवा बीमारी नहीं होनी चाहिए।
-बच्चे और माता-पिता की उम्र में कम से कम 25 साल का फर्क होना चाहिए।
-बच्चे को गोद लेने के लिए माता पिता दोनों की रजामंदी होना चाहिए।
-अगर कोई महिला किसी बच्चे को गोद लेना चाहती है तो वह लड़का या लड़की में से किसी को भी आसानी से गोद ले सकती हैं।
- अगर कोई पुरुष बच्चे को गोद लेना चाहता है तो उसे केवल लड़का ही गोद दिया जाता है।
- कपल लड़का या लड़की में से किसी को भी गोद ले सकता है।
- माता-पिता की बच्चा गोद लेते समय आर्थिक स्थिति सही होनी चाहिए।
ये दस्तोवज है आवश्यक
- गोद लेने वाले परिवार की मौजूदा तस्वीर।
- बच्चे को गोद लेने वाले परिवार या शख्स का पैन कार्ड।
- बर्थ सर्टिफिकेट या कोई भी ऐसा डॉक्यूमेंट जिससे उस व्यक्ति की जन्म तिथि का प्रमाण मिल सके।
- आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, नवीनतम बिजली का बिल, टेलीफोन बिल इन सब में से किसी भी एक डॉक्यूमेंट का होना बेहद जरूरी।
- उस साल के इनकम टैक्स की ऑथेंटिक कॉपी
- गोद लेने के इच्छुक दंपति को अपने-अपने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराने होंगे। वह सर्टिफिकेट किसी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर का साइन किया हुआ प्रमाण पत्र हो सकता है, जिससे साबित हो जाए कि बच्चे को गोद लेने वाले शख्स को किसी तरह की बीमारी नहीं है।
- गोद लेने वाला शख्स शादीशुदा है तो शादी का प्रमाण पत्र ( अगर शादीशुदा हैं तो)।
- व्यक्ति तलाकशुदा है तो उसका प्रमाणपत्र।
-गोद लेने के पक्ष में इच्छुक व्यक्ति से जुड़े दो लोगों का बयान।
- अगर इच्छुक व्यक्ति का कोई बच्चा पहले से ही है और उसकी उम्र पांच साल से अधिक है तो उसकी सहमति।
भारत में बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया
भारत में बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया हिंदू दत्तक और भरण पोषण अधिनियम 1956 और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत पूरी की जाती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resource Authority) इस प्रक्रिया की देखरेख करता है। हिमाचल प्रदेश में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी कार्यरत है। इसी के माध्यम से बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होती है।
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