हरित पंचायतों की आय का 25 प्रतिशत अनाथों और विधवाओं के कल्याण पर होगा व्यय

हरित पंचायत पहल अब राज्य भर के अनाथों और विधवाओं के कल्याण एवं उत्थान में भी योगदान देगी। यह अभिनव कदम न केवल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को भी सहयोग प्रदान करेगा, जिससे समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित होगा

Jun 4, 2026 - 16:15
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हरित पंचायतों की आय का 25 प्रतिशत अनाथों और विधवाओं के कल्याण पर होगा व्यय

यंगवार्ता न्यूज शिमला 4 जून, 2026 : 

हरित पंचायत पहल अब राज्य भर के अनाथों और विधवाओं के कल्याण एवं उत्थान में भी योगदान देगी। यह अभिनव कदम न केवल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को भी सहयोग प्रदान करेगा, जिससे समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित होगा। इस पहल के सामाजिक कल्याण पक्ष को और सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने योजना के अंतर्गत राजस्व वितरण मॉडल में संशोधन करने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम के तहत राज्य की 100 ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता की भूमि-आधारित सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं।


संशोधित राजस्व वितरण व्यवस्था के अनुसार, इन परियोजनाओं से प्राप्त आय का 20 प्रतिशत राज्य सरकार को दिया जाएगा, 20 प्रतिशत परियोजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव के लिए हिमऊर्जा को आवंटित किया जाएगा, 10 प्रतिशत हिमऊर्जा को मिलेगा, 25 प्रतिशत संबंधित ग्राम पंचायत को विकास कार्यों के लिए प्रदान किया जाएगा तथा शेष 25 प्रतिशत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा, जिससे संबंधित ग्राम पंचायत के अनाथों और विधवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।


वर्तमान राज्य सरकार ने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है तथा उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न पहल की हैं। सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना है, जिसके तहत अनाथ बच्चों की शिक्षा, देखभाल और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक अनाथ बच्चे को प्रतिमाह 4,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इस योजना से राज्य के लगभग 6,000 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, भवन निर्माण के लिए वित्तीय सहायता के अतिरिक्त जिन पात्र लाभार्थियों के पास भूमि नहीं है, उन्हें मकान निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध करवाई जा रही है। 


इसी प्रकार, विधवाओं को मकान निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन यापन कर सकें। सरकार विधवाओं के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भी सहयोग दे रही है, ताकि वे अपने समकक्षों के साथ समान अवसरों पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।


मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं। इन पहलों ने वंचित बच्चों को अन्य बच्चों के समान अवसर प्रदान किए हैं, जिससे वे प्रतिस्पर्धा कर आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए बढ़ाई गई वित्तीय सहायता उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगी तथा रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध करवाएगी, जिससे वे अधिक सुरक्षित और समृद्ध जीवन जीने में सक्षम होंगे।

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