उन्नत कृषि तकनीतें अपनाएं किसान , कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने जारी की एडवायजरी 

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने फरवरी महीने के पहले पखवाड़े में किए जाने वाले मौसम पूर्वानुमान सम्बन्धित कृषि एवं पशुपालन कार्यों के बारे में मार्गदर्शिका जारी की है जिसे अपनाकर किसान लाभान्वित हो सकते हैं। गेहूं की फसल में अच्छे उत्पादन के लिए समय अनुसार सिंचाई करें एवं खाद की अनुमोदित मात्रा का प्रयोग करें। गोभी सरसों में फूल आने से पहले यूरिया की अनुमोदित मात्रा खेत में डालें

Feb 1, 2025 - 19:40
Feb 1, 2025 - 19:54
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उन्नत कृषि तकनीतें अपनाएं किसान , कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने जारी की एडवायजरी 
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यंगवार्ता न्यूज़ - पांवटा साहिब  01-02-2025
चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने फरवरी महीने के पहले पखवाड़े में किए जाने वाले मौसम पूर्वानुमान सम्बन्धित कृषि एवं पशुपालन कार्यों के बारे में मार्गदर्शिका जारी की है जिसे अपनाकर किसान लाभान्वित हो सकते हैं। गेहूं की फसल में अच्छे उत्पादन के लिए समय अनुसार सिंचाई करें एवं खाद की अनुमोदित मात्रा का प्रयोग करें। गोभी सरसों में फूल आने से पहले यूरिया की अनुमोदित मात्रा खेत में डालें। पौधों की संख्या अगर खेत में अधिक हो तो यूरिया के प्रयोग से पहले फालतू पौधों को निकालें। कृषि विज्ञान केंद्र धौला कुआं के प्रभारी डा. पंकज मित्तल ने बताया कि अधिक आमदनी प्राप्त करने के लिए निचले एवं मैदानी क्षेत्रों में भिंडी की उन्नत किस्मों की बिजाई करें, कद्दूवर्गीय या बेल वाली सब्जियों घीया, तोरी, करेला इत्यादि की बुवाई की जा सकती है और मिर्च, बैंगन, शिमला मिर्च, टमाटर की पौध की बुवाई करें। 
फूलगोभी, बन्दगोभी, प्याज व लहसुन इत्यादि में निराई-गुड़ाई करें तथा निराई- गुड़ाई करते समय 50 कि.ग्रा. यूरिया प्रति हेक्टेयर खेतों में डालें। इस समय लहसुन एवं प्याज की निराई-गुड़ाई के बाद सिंचाई करें। उन्होंने बताया कि प्याज में डाउनी मिल्ड्यू व परपल ब्लोच  तथा लहसुन में बीमारी के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब या रिडोमिल एम.जैड 2.5 ग्राम/ली. पानी मे घोल कर छिड़काव करें। गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग के प्रबंधन के लिए टिल्ट (प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी.) या टेबुकोनाजोल 25 ईसी. या बेलाटान 25 डब्ल्यू.पी. का 0.1 प्रतिशत घोल यानि  60 मि.ली. रसायन 60 लीटर पानी में घोलकर प्रति बीघा की दर से छिड़काव करें व 15 दिन के अन्तराल पर इसे फिर से दोहराएं। तिलहनी फसलों में तेला / एफिड़ के नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट (30 ई.सी.) या ऑक्सीडेमेटोन मिथाईल (25 ई.सी.) दवा की 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 
प्रभावी नियंत्रण के लिए एक बीघा में 60 लीटर घोल का छिड़काव अवश्य करें। छिड़काव सुबह 9.00 बजे से पहले करें, ताकि मित्र कीटों जैसे मधुमक्खी को क्षति न हो। साग वाली फसलों में कीटनाशक का छिड़काव न करें। चने में फली - छेदक सुंडी के आक्रमण के प्रति सावधान रहें तथा इसका अधिक प्रकोप होने की स्थिति में वैज्ञानिकों या कृषि अधिकारियों से संपर्क करें। बारिश और बर्फबारी के बाद पशुओं  को ठंड से बचाने के सभी कार्य सुनिश्चित करें, जैसे की अत्यधिक खराब मौसम में कृत्रिम रोशनी का प्रबंध, पशुओं को मोटे कपड़े या बोरों से ढंकना, गुनगुना पानी पीने के लिए देना, पशुओं के शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए उन्हें खली और गुड़ का मिश्रण खिलाना, गौशाला के फर्श पर सूखे पत्ते या घास को बिछाना आदि शामिल हैं। सर्दियों में पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी रखें और किसी भी बीमारी के प्रारम्भिक लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह प्राप्त करें। 
भेड़-बकरी में घातक संक्रामक रोग जैसे एंटर टॉक्सेमिया और पॉक्स इस समय किन्नौर जिले में संभावित हो सकता हैं। प्रभावित जानवरों में पेट दर्द के लक्षण जैसे कि पेट पर लात मारना, बार-बार लेटना और उठना तथा दस्त लगना, एंटर टॉक्सेमिया के लक्षण हो सकते है। एंट्री टॉक्सिमिया और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए उनका टीकाकरण पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार अवश्य करवाएं। पशुओं में थनैला रोग की रोकथाम के लिए, उन्हें पूरी तरह से दुहना चाहिए तथा सभी पशुओं , विशेषकर नवजात पशुओं को कृमि मुक्त रखने के लिए उन्हे पशु चिकित्सक की सलाह से परजीवी रोधी दवाई खिलाएं। फरवरी माह में मछली पालक अपने तालाब की तैयारी नए मछली बीज ड़ालने के लिए शुरू करें। जब धूप हो तो 25 से 30 ग्राम प्रति वर्ग मीटर की दर से चूने का छिड़काव तालाब में करें। 
चूने के छिड़काव के एक दो दिन बाद 2 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर की दर से जैविक खाद ( गोबर खाद, मूर्गी खाद या अन्य जैविक कचरा ) का प्रयोग करें। पहली बार में जैविक खाद का प्रयोग 1 किलोग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से करें तथा उसके 7 से 15 दिनों बाद शेष बचे खाद का प्रयोग कई किस्तों में करें। खाद के प्रयोग के बाद तालाब को पानी से भरकर 15 से 20 दिनों के लिए छोड़ दें। इसके अलावा किसान इस समय अपने पुराने तालाब की सफाई भी करें। किसानों एवं पशु पालकों से अनुरोध है कि अपने क्षेत्रों की भौगोलिक तथा पर्यावरण परिस्थितियों के अनुसार अधिक जानकारी हेतु कृषि विज्ञान केंद्र , सिरमौर से सम्पर्क में रहें। इसके अतिरिक्त कृषि संबंधित अन्य विशिष्ट जानकारी के लिए प्रसार शिक्षा निदेशालय, पालमपुर के कृषि तकनीकी सूचना केन्द्र से 01894 - 230395/ 1800 - 180 - 1551 पर भी सम्पर्क कर सकते हैं।

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