काम में कोताही वाले स्वास्थ्य अधिकारियों होगी विभागीय कार्रवाई , कोर्ट ने दिखाई सख्ती कहा , गलती न दोहराएं कर्मी

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही और उदासीन रवैये के कारण उन्हें अब विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने 45 डॉक्टरों को पीजी करने की अनुमति से जुड़े मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए ये आदेश पारित कर दिए। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार 45 डॉक्टर , जिन्होंने सरकारी खर्च पर पीजी कोर्स किया था और अपनी डिग्री पूरी करने के बाद दो साल तक राज्य की सेवा करने का बॉन्ड भरा था

May 29, 2025 - 11:40
May 29, 2025 - 11:48
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काम में कोताही वाले स्वास्थ्य अधिकारियों होगी विभागीय कार्रवाई , कोर्ट ने दिखाई सख्ती कहा , गलती न दोहराएं कर्मी
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  29-05-2025


स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही और उदासीन रवैये के कारण उन्हें अब विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने 45 डॉक्टरों को पीजी करने की अनुमति से जुड़े मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए ये आदेश पारित कर दिए। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार 45 डॉक्टर , जिन्होंने सरकारी खर्च पर पीजी कोर्स किया था और अपनी डिग्री पूरी करने के बाद दो साल तक राज्य की सेवा करने का बॉन्ड भरा था। 

उन्हें इस कारण से बॉन्ड की शर्त से बाहर निकलने की अनुमति दी गई है कि पीजी/सुपर स्पेशियलिटी पॉलिसी दिनांक 27 फरवरी, 2019 के खंड 6.8.2 के अनुसार, प्रतिवादी राज्य सरकार परिणाम की घोषणा से एक महीने की अवधि के भीतर पोस्टिंग आदेश जारी करने में असमर्थ था। उक्त नीति के खंड 6.8.2 में ऐसी परिस्थितियां प्रदान की गई हैं, जिनके तहत सीधे तौर पर नियुक्ति के मामले में बॉन्ड की शर्त लागू नहीं होगी। उपर्युक्त धारा के अनुसार वे प्रत्यक्ष अभ्यर्थी, जिनके मामले में सरकार-डीएचएस या डीडीएचएस पीजी परीक्षा उत्तीर्ण करने के एक महीने के भीतर फील्ड पोस्टिंग के लिए कोई आदेश जारी करने में विफल रहते है। 
बॉन्ड की शर्त वाले आदेश नहीं होंगे और इस तरह वे बॉन्ड की शर्त से मुक्ति की मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की पोस्टिंग आदेश जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही और लापरवाह रवैये को देखते हुए, परिणाम की घोषणा की तारीख से एक महीने की अवधि के भीतर न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी मंत्री को निर्देश दिया है कि वे दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई शुरू करें, ताकि भविष्य में ऐसी गलती न हो।
 

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