खाकी की आड़ में करते थे नशे का कारोबार , नशा तस्करी में संलिप्त एसटीएफ के चार पुलिसकर्मी गिरफ्तार

शिमला पुलिस ने एक ऐसा 'महा-धमाका' जिसने महकमे के भीतर छिपे गद्दारों की नींद उड़ा दी है। प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की कसम खाने वाले खाकी के पीछे छिपे नशा तस्कर आज खुद सलाखों के पीछे हैं। 10 मार्च को शुरू हुई एलएसडी तस्करी की जांच जब गहराई में उतरी , तो कड़ियां पंजाब और गुरुग्राम से होते हुए सीधे पुलिस विभाग के भीतर जा मिलीं। शिमला पुलिस ने साफ कर दिया है कि जीरो टॉलरेंस का मतलब सिर्फ कागजों पर नहीं , बल्कि जमीन पर एक्शन है। चाहे रसूखदार हो या खाकी वाला , जो नशा बेचेगा , वह जेल जाएगा

Mar 19, 2026 - 19:25
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खाकी की आड़ में करते थे नशे का कारोबार , नशा तस्करी में संलिप्त एसटीएफ के चार पुलिसकर्मी गिरफ्तार
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  19-03-2026
शिमला पुलिस ने एक ऐसा 'महा-धमाका' जिसने महकमे के भीतर छिपे गद्दारों की नींद उड़ा दी है। प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की कसम खाने वाले खाकी के पीछे छिपे नशा तस्कर आज खुद सलाखों के पीछे हैं। 10 मार्च को शुरू हुई एलएसडी तस्करी की जांच जब गहराई में उतरी , तो कड़ियां पंजाब और गुरुग्राम से होते हुए सीधे पुलिस विभाग के भीतर जा मिलीं। शिमला पुलिस ने साफ कर दिया है कि जीरो टॉलरेंस का मतलब सिर्फ कागजों पर नहीं , बल्कि जमीन पर एक्शन है। चाहे रसूखदार हो या खाकी वाला , जो नशा बेचेगा , वह जेल जाएगा। 
तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत शिमला पुलिस ने एक ऐतिहासिक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की मुहिम में जुटी पुलिस ने न केवल बाहरी सप्लायरों को दबोचा है, बल्कि विभाग के भीतर मौजूद उन चेहरों को भी बेनकाब कर दिया है जो रक्षक बनकर भक्षक का काम कर रहे थे। अभिषेक ने बताया कि मामले की शुरुआत 10 मार्च 2026 को हुई जब न्यू शिमला पुलिस ने संदीप शर्मा (पंजाब) और प्रिया शर्मा ( सिरमौर ) के पास से 11.570 ग्राम एलएसडी ( 562 स्ट्रिप्स ) बरामद की थी। 
तफ्तीश की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस सप्लायर नेविल हैरिसन ( केरल ) तक पहुँची और उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि बैकवर्ड लिंकेज की गहन जांच और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के दौरान एक बेहद शर्मनाक सच सामने आया। पता चला कि कुल्लू जिला में इस तस्करी को इंटरसेप्ट करने के बावजूद , एसटीएफ (Special Task Force) में तैनात चार पुलिसकर्मियों ने तस्करों को पकड़ने के बजाय उनके साथ मिलकर इस काले कारोबार को बढ़ावा दिया। यह न केवल आपराधिक षड्यंत्र था, बल्कि नैतिक कदाचार की पराकाष्ठा थी। 
शिमला पुलिस की सिफारिश और एडीजी सीआईडी द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद इन चारों कर्मचारियों को 16 मार्च को निलंबित कर दिया गया था। साक्ष्यों के आधार पर  19 मार्च 2026 को शिमला पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया , इनमे मुख्य आरक्षी राजेश कुमार मनाली, कुल्लू। मुख्य आरक्षी समीर भुंतर, कुल्लू। मुख्य आरक्षी नितेश भुंतर, कुल्लू और आरक्षी अशोक कुमार कुल्लू को गिरफ्तार किया। ​इन सभी को कल माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।
 

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