जुन्गा शहर में समस्याओं का अंबार - नवनिर्वाचित पंचायत के लिए बड़ी चुनौती
रियासतकालीन जुन्गा कस्बा आज भी वर्षों पुरानी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। करीब चार हजार की आबादी वाले इस कस्बे में सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय, पार्किंग, बस अड्डा और बाईपास सड़क जैसी सुविधाओं का अभाव स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। ऐसे में नवनिर्वाचित पंचायत के सामने जुन्गा के सुनियोजित विकास और बुनियादी सुविधाओं को पटरी पर लाना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पंचायत के पास अभी तक कस्बे की नियमित सफाई की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है, जिससे लोगों में नाराजगी है। वहीं, बाहर से आने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक शौचालय की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। बस स्टैंड पर वर्षों पहले बना शौचालय बिना देखरेख और कर्मचारियों के अभाव में बदहाल स्थिति में है। प्रतिदिन तहसील, अस्पताल, राज्य स्तरीय फोरेंसिक प्रयोगशाला तथा अन्य सरकारी कार्यालयों में विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं, लेकिन विशेषकर महिलाओं को शौचालय की कमी के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने एक बार फिर जुन्गा को नगर पंचायत अथवा शहरी निकाय का दर्जा देने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी आबादी और अनेक महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की मौजूदगी के बावजूद कस्बे को आज तक नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिल सका है। यही नहीं, इसे साडा के दायरे में भी शामिल नहीं किया गया, जिससे योजनाबद्ध विकास नहीं हो पा रहा है। नगर नियोजन कानून लागू न होने के कारण भवन निर्माण भी मनमाने ढंग से हो रहा है।
पुराने जुन्गा क्षेत्र के लिए बाईपास सड़क नहीं होने से भारी वाहनों को बाजार की संकरी गलियों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा बस अड्डे और पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने से स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले वाहन चालकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पंचायत प्रधान रामलाल ने कहा कि जुन्गा शहर के सुनियोजित विकास के लिए व्यापक योजना तैयार की जाएगी।
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