न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम पर प्राथमिक शिक्षकों का हल्लाबोल,CM से वार्ता के न्यौते के बीच आर-पार की लड़ाई का ऐलान
हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए 'न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम' (क्लस्टर सिस्टम) को लेकर सरकार और प्राथमिक शिक्षक संघ के बीच तल्खी अपने चरम पर पहुंच गई है। अपनी 25 सूत्रीय लंबित मांगों और क्लस्टर सिस्टम के विरोध में 11 जुलाई को कांगड़ा के माता बगलामुखी मंदिर से शुरू हुई शिक्षकों की पदयात्रा विभिन्न जिलों से होते हुए शिमला पहुंच चुकी है।
हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने प्रेसवार्ता में सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में प्राथमिक शिक्षा का मौजूदा मजबूत ढांचा वर्ष 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह की सरकार के दौरान तैयार किया गया था। आज उसी पार्टी की सरकार अपने ही दिए इस ऐतिहासिक ढांचे को मिटाने पर तुली हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 से 20 प्राथमिक स्कूलों को एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल के अधीन करना गुणात्मक सुधार के नाम पर केवल एक छलावा है। इसका असल मकसद प्राथमिक विद्यालयों में रिक्त पड़े जेबीटी के पांच हजार पदों को न भरना है। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को छिपाने के लिए प्रिंसिपलों को यह अधिकार सौंप दिया गया है कि वे लैब असिस्टेंट, शारीरिक शिक्षक (PET) और ड्राइंग मास्टर को प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने भेजें, जो कि शिक्षा के नाम पर महज एक खानापूर्ति है।
रमेश शर्मा ने जमीनी हकीकत और आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश के करीब तीन हजार प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। ऊपर से चुनाव और जनगणना जैसी गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में 50 प्रतिशत से अधिक ड्यूटी प्राथमिक शिक्षकों की ही लगा दी जाती है। पठन-पाठन प्रभावित होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकाल रहे हैं और करीब 200 प्राथमिक विद्यालय हमेशा शिक्षकों के बिना तालाबंदी का शिकार रहते हैं। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद शिक्षकों की निष्ठा और मेहनत का ही परिणाम है कि हिमाचल प्रदेश ने 'असर' (ASER) रिपोर्ट 2023 में केरल जैसे साक्षर राज्य को पछाड़कर देश में पहला स्थान हासिल किया। इतना ही नहीं, नेशनल अचीवमेंट सर्वे (NAS) 2024 में भी तीसरी कक्षा के प्राथमिक वर्ग ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान पाया है। लेकिन सरकार इन उपलब्धियों को सराहने के बजाय, पिछले दो सालों से अंडर-12 खेल गतिविधियों को बंद करके छोटे बच्चों के विकास का मंच छीन रही है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद इन खेलों को शिक्षा विभाग के खेल कैलेंडर से बाहर रखा गया है।
उन्होंने कहा कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह से गांधीवादी और शांतिपूर्ण है। बच्चों की पढ़ाई और आम जनता का यातायात बाधित न हो, इसी संवेदनशीलता के साथ पदयात्रा जानबूझकर ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान निकाली गई। लेकिन सरकार ने संवाद के बजाय प्रतिशोध की भावना से काम करते हुए 26 अप्रैल 2025 को हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद संघ के आठ पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया और कई शिक्षकों पर विभागीय जांच व एफआईआर दर्ज करवा दी। रमेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि शिक्षक हर तरह की दंडात्मक कार्रवाई का मानसिक रूप से सामना करने को तैयार हैं और शिक्षा को बचाने के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी दे सकते हैं। यदि न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम की अधिसूचना रद्द नहीं हुई और जेबीटी से टीजीटी प्रमोशन पर तीन साल से लगी रोक, दो साल के बाद मिलने वाले हायर ग्रेड पे की बहाली तथा छठे वेतन आयोग व महंगाई भत्ते के बकाए जैसी मांगें नहीं मानी गईं, तो संघ वर्ष 2027 तक अनिश्चितकालीन आंदोलन और क्रमिक अनशन के लिए बाध्य होगा। प्रदेश भर के 60 हजार प्रशिक्षित जेबीटी बेरोजगार युवाओं और नर्सरी ट्रेनिंग प्राप्त अभ्यर्थियों का भी इस आंदोलन को भरपूर समर्थन मिल रहा है।
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