31 जनवरी 2026 तक प्रदेश पर बकाया ऋण पहूंचा 1,01,863 करोड़, सरकार श्वेतपत्र जारी कर दे हिसाब - जितेंद्र भोटका

जिला भाजपा प्रवक्ता शिमला जितेंद्र भोटका ने बुधवार को जारी बयान में  मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार पर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 35,555 करोड़ का नया ऋण लिया है। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री की ओर से विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर में सामने आया है।

Sep 23, 2026 - 14:13
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31 जनवरी 2026 तक प्रदेश पर  बकाया ऋण पहूंचा 1,01,863 करोड़, सरकार श्वेतपत्र जारी कर दे हिसाब - जितेंद्र भोटका

यंगवार्ता न्यूज - शिमला 23 सितंबर, 2026 :


 जिला भाजपा प्रवक्ता शिमला जितेंद्र भोटका ने बुधवार को जारी बयान में  मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार पर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 35,555 करोड़ का नया ऋण लिया है। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री की ओर से विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर में सामने आया है।


भोटका ने कहा कि 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश का कुल बकाया ऋण 1,01,863 करोड़ पहुंच चुका था। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद भी कर्ज लेने का सिलसिला जारी रहा है और यह ़ऋण 1.10 करोड़ पहूंच गया है । उन्होंने सवाल उठाया कि सीएम बताएं कि इतनी बड़ी राशि उधार लेने के बावजूद प्रदेश में कितने नए उद्योग स्थापित हुए, कितने बड़े अस्पताल और शिक्षण संस्थान बने, कितने स्थायी रोजगार के अवसर पैदा हुए तथा प्रदेश की आय बढ़ाने वाली कितनी नई परिसंपत्तियां तैयार की गईं है ।


भोटका ने कहा कि सरकार की उधारी का सिलसिला चालू वित्त वर्ष में भी जारी है। जिसमें  जुलाई 2026 तक सरकार करीब 2,800 करोड़ का ऋण उठा चुकी थी।  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार पूर्व भाजपा सरकार से विरासत में मिले कर्ज का हवाला देते हैं, लेकिन तीन वर्ष से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद वर्तमान सरकार को अपने कार्यकाल में लिए गए ऋण का भी जनता के सामने पूरा हिसाब देना चाहिए।


उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है  कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर श्वेतपत्र जारी किया जाए और दिसंबर 2022 से अब तक लिए गए कुल नए ऋण, चुकाए गए मूलधन एवं ब्याज, विकास तथा पूंजीगत कार्यों पर खर्च हुई राशि और इस उधारी से तैयार की गई स्थायी परिसंपत्तियों का पूरा ब्योरा जनता के सामने रखा जाए।

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