राजस्थान में सिविल जज की परीक्षा में सिख समुदाय की महिला को वंचित रखने पर मांगी कार्रवाई

राजस्थान के जयपुर में बीते दिनों आयोजित हुई सिविल जज की परीक्षा में पंजाब की एक सिख धर्म की छात्रा को न बैठने देने पर समुदाय ने विरोध जताया है। मामले को लेकर देश के प्रधानमंत्री समेत राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया है जिसमें इस तरह के मामलों पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई है। मीडिया से बात करते हुए समुदाय के तरसेम सिंह सगी ने बताया कि राजस्थान के जयपुर में बीते दिनों सिविल जज की एक परीक्षा आयोजित हुई थी

Jul 31, 2025 - 18:46
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राजस्थान में सिविल जज की परीक्षा में सिख समुदाय की महिला को वंचित रखने पर मांगी कार्रवाई
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  31-07-2025
राजस्थान के जयपुर में बीते दिनों आयोजित हुई सिविल जज की परीक्षा में पंजाब की एक सिख धर्म की छात्रा को न बैठने देने पर समुदाय ने विरोध जताया है। मामले को लेकर देश के प्रधानमंत्री समेत राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया है जिसमें इस तरह के मामलों पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई है। मीडिया से बात करते हुए समुदाय के तरसेम सिंह सगी ने बताया कि राजस्थान के जयपुर में बीते दिनों सिविल जज की एक परीक्षा आयोजित हुई थी। जिसमें भाग लेने के लिए पंजाब की एक सिख धर्म की छात्रा भी पहुंची। लेकिन छात्रा को यहां परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। सबन्धित परीक्षा हॉल में तैनात अधिकारियों ने छात्रा को कड़ा कृपाण उतारने पर परीक्षा देने की बात की। 
जिसके चलते यह छात्रा परीक्षा देने से वंचित रह गई। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामले निंदनीय है और इस तरह के मामलों पर रोक लगनी चाहिए। पांवटा साहिब में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष तरसेम सिंह सग्गी के अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने पांवटा साहिब के एसडीएम गुंजित सिंह चीमा के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में प्रदेश अध्यक्ष समेत हिमाचल किसान सभा के गुरविंदर सिंह गोपी , महासचिव गुलजार सिंह , प्रदेश सचिव एवं मंडल प्रधान हरप्रीत सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष तरण सिंह ने कहा कि चंद रोज पहले राजस्थान में गुरप्रीत कौर तरनतारन पंजाब की एक सिख धर्म से संबंधित छात्रा को सिविल जज की परीक्षा देने जाते समय उसके धार्मिक प्रतीक (कडा और करपान) उतारने को मजबूर किया। इससे वह परीक्षा से वंचित रह गई। 
राजस्थान सरकार के उक्त घटना के जिम्मेदार अधिकारियों की मनमानी के चलते उक्त छात्रा के भविष्य को खत्म करने की कोशिश की गई। ज्ञापन में कहा गया कि राजस्थान की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री सहित उनके किसी भी मंत्री ने इस मुद्दे पर बयान नहीं दिया और न ही कोई कार्रवाई जिम्मेदार लोगों के खिलाफ की गई। इसके अलावा हरियाणा में परीक्षा देते समय हिंदू-मुस्लिम लड़कियों के दुप्पटे तक उतरवाए गए। इससे हमारे संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। यूनियन ने मांग की कि इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए गए, ताकि संविधान की गरिमा को बरकरार रखा जा सके।

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