लोगों की बदली जीवनशैली के बीच किडनी के मरीजों की संख्या में हर साल 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी
हिमाचल में लोगों की बदली जीवनशैली, खान-पान के तौर तरीकों के बीच किडनी के मरीजों की संख्या में हर साल 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 12-03-2026
हिमाचल में लोगों की बदली जीवनशैली, खान-पान के तौर तरीकों के बीच किडनी के मरीजों की संख्या में हर साल 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है। इसमें करीब 13 फीसदी लोगों को समय पर किडनी रोगों का पता ही नहीं चल पाता।
राजधानी शिमला के आईजीएमसी के मेडिसन विभाग और चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में उपचार करवाने आने वाले मरीजों का आंकड़ा हाल के वर्षों में काफी बढ़ा है। 2023 में यह आंकड़ा 3694 तक था, जो 2024 में 4100 तक पहुंचा और 2025 में 4200 पार कर गया।
इनमें पुराने मरीज भी शामिल हैं। प्रदेश में 2000 से 3500 तक मरीज किडनी की बीमारी के कारण डायलिसिस पर हैं। हर साल एक हजार से 1500 मरीज किडनी की बीमारी के ठीक न हो पाने के कारण डायलिसिस पर जा रहे हैं। प्रदेश में आईजीएमसी, टांडा मेडिकल कॉलेज और एम्स बिलासपुर में अलग से किडनी रोगियों के लिए नेफ्रोलॉजी विभाग में उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
प्रदेश में प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम के तहत के 24 सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है, वहीं पीपीपी मोड के आधार पर 44 जगह डायलिसिस किया जाता है। किडनी (गुर्दा) के मुख्य कार्य में खून से अपशिष्ट और टॉक्सिन निकालना, पानी और मिनरल का संतुलन बनाए रखना, पेशाब बनाना, हार्मोन (जैसे एरिथ्रोपोइटिन) बनाना यह, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करना, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना, हड्डियों के लिए विटामिन डी को सक्रिय करने के साथ शरीर के एसिड-बेस (अम्ल-क्षार) संतुलन को बनाए रखना है।
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