सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियां वैक्सीनेशन के लिए नहीं आ रही आगे,विभाग की ओर से फील्ड में उतारी टीमें
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) या सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियां वैक्सीनेशन (टीकाकरण) के लिए आगे नहीं आ रही हैं। इससे विभाग को काफी दिक्कतें आनी शुरू हो गई हैं। सबसे अधिक दिक्कत जिले के चिकित्सा खंड सुन्नी, मतियाना, ननखड़ी, कुमारसैन और कोटखाई में आ रही है। इसे देखते हुए विभाग की ओर से फील्ड में टीमें उतार
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 08-04-2026
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) या सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियां वैक्सीनेशन (टीकाकरण) के लिए आगे नहीं आ रही हैं। इससे विभाग को काफी दिक्कतें आनी शुरू हो गई हैं। सबसे अधिक दिक्कत जिले के चिकित्सा खंड सुन्नी, मतियाना, ननखड़ी, कुमारसैन और कोटखाई में आ रही है। इसे देखते हुए विभाग की ओर से फील्ड में टीमें उतार दी हैं।
यह टीमें सूचना, शिक्षा और संपर्क के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रही हैं। अभी तक 871 बच्चियों का टीकाकरण ही हुआ है, जबकि तीन सेशन जिले में हो चुके हैं। हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चियों में कम जागरूकता को देखते हुए स्कूलों में कैंप लगाने शुरू कर दिए हैं।
विभाग का मानना है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चियों ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीका लगवाया है। इन बच्चियों में किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट्स नहीं आए हैं। जिले में 29 मार्च से सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण शुरू किया है। 14 से 15 साल 90 दिन पूरे कर चुकी बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर के टीकाकरण किया जा रहा है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का दूसरा बड़ा कारण बच्चेदानी के मुंह का कैंसर है। सर्वाइकल कैंसर के लगभग 99.7% मामले ऑन्कोजेनिक (उच्च जोखिम वाले) एचपीवी प्रकारों के लगातार संक्रमण के कारण होते हैं।
यह टीका बाजार में 4000 से 5000 रुपये में निजी स्तर पर लगाया जाता है, जबकि सरकार की ओर से इसे अस्पतालों में मुफ्त में लगाया जा रहा है। शिमला जिले के 39 कोल्ड चेन में सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित बच्चियों का टीकाकरण किया जा रहा है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियों का टीकाकरण इसलिए जरूरी है ताकि गंभीर समस्या से बचाव किया जा सके। वैक्सीन लग जाती है तो बच्चियाें को काफी फायदा होगा। वैक्सीन की एक्युरेसी भी 83 फीसदी है। वैक्सीन लगाने के साथ ही एंटी बॉडी बनना शुरू हो जाती है।
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