एनएबीएल के मूल्यांकन पर खरी उतरी एस0एफ0एस प्रयोगशाला जुन्गा
नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (एन.ए.बी.एल) की मूल्यांकन टीम ने जुन्गा स्थित राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का दो दिवसीय मूल्यांकन किया गया । मूल्यांकन टीम का नेतृत्व डॉ. ओंकार संतोषराव मोंढे ने किया और इसमें देश भर के प्रतिष्ठित फॉरेंसिक संस्थानों के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. कविता गोयल, डॉ. राजीव कवात्रा, डॉ. अमन कुमार यादव और डॉ. एच. जे. त्रिवेदी शामिल रहे। टीम ने प्रयोगशाला की गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, तकनीकी प्रणाली और उसके फॉरेंसिक विशेषज्ञों की दक्षता का व्यापक मूल्यांकन किया।
शिमला 29 अप्रैल, 2026 :
डॉ. मीनाक्षी महाजन, निदेशक फॉरेंसिक सेवाएं ने बताया कि एन0ए0बी0एल0 द्वारा वार्षिक मूल्यांकन गुणवत्ता मानकों, परिचालन दक्षता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानदंडों के अनुरूप फॉरेंसिक विशेषज्ञों की दक्षता का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। इन मानकों का पालन करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि फॉरेंसिक रिपोर्ट जांच एजेंसियों को सौंपी जाती हैं और अंततः कानून की अदालतों में प्रस्तुत की जाती हैं, जहां वे न्याय प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
डॉ. मीनाक्षी महाजन, निदेशक फॉरेंसिक सेवाएं, हिमाचल प्रदेश ने बताया कि राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, हिमाचल प्रदेश, शिमला हिल्ज, जुंगा 2018 से नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज से मान्यता प्राप्त है और वर्तमान में दस प्रभाग है। इनमें जीव बायोलॉजी एवं सीरोलॉजी विभाग, रसायन एवं विषविज्ञान विभाग, डी.एन.ए. विभाग, दस्तावेज एवं फोटोग्राफी विभाग, डिजिटल फॉरेंसिक विभाग, एन.डी.पी.एस. विभाग, भौतिक एवं बैलिस्टिक्स विभाग, वाइस विश्लेषण विभाग, फॉरेंसिक मनोविज्ञान विभाग और राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो शामिल हैं।
उन्होने बताया कि एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, फॉरेंसिक सेवा निदेशालय, हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो को 2024 में नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज मान्यता प्राप्त हुई है जिससे यह भारत का पहला मान्यता प्राप्त फिंगर प्रिंट ब्यूरो बन गया।
डॉ. मीनाक्षी महाजन ने बताया कि मौजूदा हालात में, पूरे भारत में फॉरेंसिक प्रयोगशालाएँ नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज द्वारा तय किए गए मानकों को तेजी से अपना रही हैं, जिससे वैश्विक मानकों के अनुरूप तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है। यह मान्यता प्रक्रिया हिमाचल प्रदेश के फॉरेंसिक बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और न्याय व्यवस्था को सहयोग देने के लिए विश्वसनीय, उच्च-गुणवत्ता वाली वैज्ञानिक सेवाएँ सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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