प्रदेश में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के रिकॉर्ड की जांच में बड़ा फर्जीवाडा 

हिमाचल प्रदेश में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के रिकॉर्ड की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। ट्रेजरी रिकॉर्ड में ऐसे कई लाभार्थियों के नाम दर्ज मिले

Mar 4, 2026 - 11:17
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प्रदेश में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के रिकॉर्ड की जांच में बड़ा फर्जीवाडा 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    04-03-2026

हिमाचल प्रदेश में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के रिकॉर्ड की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। ट्रेजरी रिकॉर्ड में ऐसे कई लाभार्थियों के नाम दर्ज मिले हैं, जिनकी आयु 110 से 120 वर्ष तक दर्शाई गई है और उनके बैंक खातों में सरकारी योजनाओं का पैसा लगातार जमा हो रहा है। 

मामला सामने आने पर अब वित्त विभाग ने 10 साल में मृत व्यक्तियों के बैंक खातों की जांच के निर्देश जारी किए हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत करीब एक लाख दावे रहित बैंक खाते बंद करने की प्रक्रिया के दौरान अन्य विभागों की योजनाओं में भी मृत व्यक्तियों के नाम पर भुगतान होने का खुलासा हुआ है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई मामलों में लाभार्थियों की मृत्यु के बाद भी उनके बैंक खाते सक्रिय बने रहे और सरकारी योजनाओं की राशि जारी होती रही। ट्रेजरी स्तर पर रिकॉर्ड के मिलान के दौरान ऐसे लाभार्थियों की पहचान हुई जिनकी आयु असामान्य रूप से अधिक दर्ज है, जिससे विभाग को बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका हुई है। 

वित्त विभाग ने सभी ट्रेजरी कार्यालयों और बैंकों को निर्देश दिए हैं कि पिछले 10 वर्षों में मृत व्यक्तियों के बैंक खातों का मिलान विभागीय रिकॉर्ड, आधार डाटा और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से किया जाए। जिन मामलों में मृत्यु के बाद भी भुगतान हुआ है, उनकी अलग से सूची तैयार की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार कई लाभार्थियों के डाटा को वर्षों से अपडेट नहीं किया गया, जिसके कारण मृत्यु के बाद भी उन्हें योजनाओं का लाभ मिलता रहा। सरकार का अनुमान है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से मृत व अपात्र लाभार्थियों को हटाने के बाद साल में करीब 180 करोड़ की बचत होगी।

जांच के दायरे में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अलावा कृषि, स्वास्थ्य और आवास विभाग से संबंधित योजनाएं भी शामिल की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि लाभार्थियों के सत्यापन में ढिलाई और डाटाबेस अपडेट नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है। बैंकों को चेताया गया है कि अगर इन खातों के आपरेटिव होने में बैंकों की भूमिका पाई गई तो एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। विजिलेंस या सीआईडी से भी जांच करवाई जा सकती है।

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