द्राबिल गांव की पावन भूमि पर पहुंची छत्रधारी चालदा महासू महाराज की पालकी,ऐतिहासिक पल के साक्षी बने सैकड़ों लोग 

कड़ाके की ठंड से जूझती रात का वह पावन क्षण, जब तड़के करीब 3 बजे छत्रधारी चालदा महासू महाराज द्राबिल गांव पहुंचे। यह दृश्य मात्र आंखों से देखने का नहीं, बल्कि दिल से महसूस करने वाला

Dec 14, 2025 - 12:18
Dec 14, 2025 - 12:19
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द्राबिल गांव की पावन भूमि पर पहुंची छत्रधारी चालदा महासू महाराज की पालकी,ऐतिहासिक पल के साक्षी बने सैकड़ों लोग 
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन    14-12-2025

कड़ाके की ठंड से जूझती रात का वह पावन क्षण, जब तड़के करीब 3 बजे छत्रधारी चालदा महासू महाराज द्राबिल गांव पहुंचे। यह दृश्य मात्र आंखों से देखने का नहीं, बल्कि दिल से महसूस करने वाला था। ठिठुरन भरी रात, शीतल हवाएं और तापमान शून्य के करीब, बावजूद अडिग थी श्रद्धालुओं की आस्था। 

हजारों भक्त पूरी रात अपने आराध्य देवता के आगमन की प्रतीक्षा में पलकें बिछाए खुले आसमान के नीचे डटे रहे। जैसे ही घड़ी ने लगभग 3 बजे का समय दर्शाया और चालदा महासू महाराज की पालकी द्राबिल गांव की पावन भूमि पर पहुंची, मानो पूरा क्षेत्र भक्ति रस में डूब गया। 

ढोल-नगाड़ों की गूंज, जयकारों की अनुगूंज और श्रद्धा से भरी आंखों ने उस क्षण को अलौकिक बना दिया। अनुमानतः करीब 30 हजार श्रद्धालु एकत्र हुए और अपने देवता का भव्य स्वागत किया। हर चेहरा आस्था से दमक रहा था, हर हृदय में विश्वास की लौ प्रज्वलित थी।

यह केवल एक देव आगमन नहीं था, बल्कि सदियों पुरानी देव परंपरा, आस्था और विश्वास की जीवंत मिसाल थी। ठंड से कांपते शरीरों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह और समर्पण यह दर्शा रहा था कि देव आस्था के आगे हर कठिनाई छोटी पड़ जाती है। पूरी रात जागकर, बिना किसी शिकायत के, भक्त अपने देवता के स्वागत में लीन रहे।

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